बिहार राज्य ग्राम कचहरी न्यायमित्र संघ का तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन समाप्त
राष्ट्र संवाद बिहार (उप ब्यूरो) अशोक कुमार ठाकुर
बिहार राज्य ग्राम कचहरी न्यायमित्र संघ द्वारा आयोजित पटना के गर्दनीबाग में राज्य स्तरीय तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन अध्यक्ष डा० उदय नारायण प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को शान्ति पूर्वक समाप्त हो गया। बिहार के प्रत्येक ग्राम कचहरी में सरपंच एवं न्यायपीठ को विधिक सलाह एवं सहायता प्रदान करने के लिए संविदा पर न्यायमित्र का नियोजन वर्ष 2007-08 में नियुक्ति किया गया। वर्ष 2015 में इनके मानदेय में बढ़ोतरी कर 7000/ साथ हजार रुपए मासिक किया गया, लेकिन आज बारह वर्ष व्यतीत होने को चला उसके उपरांत भी सरकार द्वारा मानदेय में वृद्धि करना न्यायोचित नहीं समझा गया।
सभा को सम्बोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष नवल किशोर प्रसाद ने कहा वर्ष 2021 में तत्कालीन मंत्री पंचायती राज विभाग श्री सम्राट चौधरी थे तो अपने कार्यकाल में मानदेय वृद्धि के लिए तीन बार संचिका को वित्त विभाग स्वीकृति के लिए भेजे, लेकिन तीनों बार संचिका वापस कर दिया गया। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बिहार के विभिन्न विभागों में कार्यरत सभी संविदा कर्मियों के मानदेय में वृद्धि किया गया लेकिन न्यायमित्र के मानदेय में वृद्धि की संचिका वित्त विभाग द्वारा आचार संहिता लागू होने के ऐन वक्त स्वीकृत किए बिना वापस कर दिया गया, जिससे बिहार के सभी न्यायमित्र परिवार में असंतोष के साथ आक्रोश हो गया।वर्तमान माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी से बिहार के सभी न्यायमित्र को आशा और विश्वास है वर्ष 2021 में किए गए वादों एवं आश्वासन को पुरा करते हुए न्यायमित्रो का सम्मान जनक मानदेय में वृद्धि करेंगे। बेगूसराय की न्यायमित्र अंजू कुमारी ने अपने दो गीतो के माध्यम से न्यायमित्र के मानदेय वृद्धि की बातो को रखी- 1.अगे माई सुनई छलिए सम्राट चौधरी बड़ा दिलदार, न्यायमित्र संगे किया हो भैया सतौला व्यवहार।
2. सबके वेतन बढईलहो भैया, न्यायमित्र के किया ने बढ़ईलहो हो,
बढल छई मंहगाई हो भैया,सात हजार में की होतई हो।
विश्व में बिहार सरकार न्यायमित्रों के साथ बारह वर्षों तक मजाक बनाकर रखें हुए हैं। विश्व में कोई भी ऐसा मजदुर नहीं होगा जिसका मजदुरी बारह वर्षों तक यथावत होगा और एक ही मजदुरी में कार्य करता होगा।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि न्यायमित्र के मानदेय वृद्धि की संचिका वित्त विभाग को भेजा जाता है, लेकिन वित्त विभाग मानदेय वृद्धि स्वीकृत किए बिना वापस क्यों कर रही है? जबकि पंचायती विभाग से अन्य संविदा कर्मियों का मानदेय वृद्धि का संचिका भेजा जाता है वित्त विभाग द्वारा स्वीकृत कर लिया जाता है। न्यायमित्रों के बीच सरकार से सबसे बड़ा सवाल। धरना-प्रदर्शन में अड़तीसों जिला के सैंकड़ों न्यायमित्रों उपस्थित थे।

