*बखरी पुस्तकालय पोखर की दुर्दशा पर उठा सवाल, लाखों खर्च फिर भी बुरा हाल*
*बखरी (बेगूसराय)।* बखरी की जनता अब चुप नहीं है। नगर का ऐतिहासिक पुस्तकालय पोखर आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है और जनता पूछ रही है कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है?
करोड़ों रुपये की योजना आई थी। दावा था कि पोखर का कायाकल्प होगा, छठ घाट सुंदर और सुविधाजनक बनेगा। बड़ी-बड़ी उम्मीदें जगी थीं, लेकिन जमीन पर तस्वीर बिल्कुल उल्ट है। घाट टूटा-फूटा, पोखर में गंदगी और बदहाली का आलम है।
*छठ महापर्व सिर पर, बढ़ी चिंता*
कुछ ही दिनों में बिहार का महापर्व छठ पूजा है। यही वह पोखर है जहां बखरी नगर के हजारों लोग आस्था के साथ अर्घ्य देते हैं। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखकर व्रतियों और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। अगर समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो छठ में भारी परेशानी होगी।
*जनता के 5 सवाल*
पोखर की दुर्दशा देख जनता के मन में सवाल है कि जनता के पैसे से बनी योजना का ऐसा
हश्र क्यों हुआ?
क्या इसमें ठेकेदार की लापरवाही है?
क्या संबंधित विभाग ने निगरानी नहीं की?
क्या नगर प्रशासन की अनदेखी है?
क्या जनप्रतिनिधि मौन हैं?
या योजना के क्रियान्वयन में ही खोट है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि हम किसी पर बेबुनियाद आरोप नहीं लगा रहे, लेकिन काम की गुणवत्ता, खर्च हुई राशि और वर्तमान स्थिति पर सार्वजनिक रूप से जवाब मिलना चाहिए। जनता के पैसे का हिसाब जनता को मिलना ही चाहिए।
*मांग – युद्धस्तर पर हो काम*
बखरी की जनता की मांग है कि छठ से पहले पुस्तकालय पोखर की युद्धस्तर पर सफाई, घाट की मरम्मत और पानी की व्यवस्था दुरुस्त कराई जाए, ताकि महापर्व शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

