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    Home » राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती पर सिमरिया में विचार गोष्ठी आयोजित
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    राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती पर सिमरिया में विचार गोष्ठी आयोजित

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 15, 2026No Comments4 Mins Read
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    राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर
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    लेखक: यदुनंदन

    बेगूसराय जिले के बीहट प्रखंड स्थित सिमरिया ग्राम हिंदी साहित्य के आकाश में ध्रुव तारे की भांति चमकने वाले राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली है। यहां प्रतिवर्ष उनकी जयंती बड़े ही धूमधाम और साहित्यिक गरिमा के साथ मनाई जाती है। इस वर्ष राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती के शुभ अवसर पर दिनकर स्मृति विकास समिति, सिमरिया के तत्वावधान में 12 दिवसीय भव्य जयंती समारोह का आयोजन किया गया है। इस समारोह का उद्देश्य नई पीढ़ी को दिनकर के ओजस्वी काव्य, राष्ट्रवादी चेतना और हिंदी भाषा के प्रति उनके समर्पण से परिचित कराना है। सोमवार को इस कड़ी के दूसरे दिन दिनकर आवास परिसर में एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के प्रबुद्धजन, साहित्यकार, शिक्षाविद और छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

    राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की 118वीं जयंती के अवसर पर आयोजित 12 दिवसीय जयंती समारोह के दूसरे दिन सोमवार को दिनकर आवास, सिमरिया में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। राष्ट्रकवि दिनकर स्मृति विकास समिति, सिमरिया के द्वारा आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता दिनकर पुस्तकालय के अध्यक्ष विश्वम्भर सिंह ने की। इस अवसर पर मुख्य वक्ता जनवादी लेखक संघ के प्रदेश सचिव कुमार विनीताभ ने कहा कि आज हिंदी दिवस है और दिनकर जी ने भारत की राष्ट्रीय एकता के लिए हिंदी भाषा को महत्वपूर्ण सूत्र बताया था। दिनकर समतामूलक समाज के सबसे बड़े गायक कवि थे। इस बेगूसराय परिक्षेत्र में हिंदी के सबसे बड़े कवि दिनकर हैं। उनकी दृष्टि प्रगतिशील थी। उनकी रचना ‘रश्मिरथी’ आधुनिक भारत के लिए एक आदर्श ग्रंथ है। बीएचयू में हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रामाज्ञा शशिधर ने कहा कि दिनकर ने भारत सरकार के हिंदी सलाहकार के रूप में हिंदी के विकास में अहम योगदान दिया। दिनकर नई संस्कृति के निर्माता थे। बड़ा लेखक नई संस्कृति का नया फूल खिलाता है, दिनकर ऐसे ही बड़े लेखक थे। उनकी रचनाओं में केवल स्मृति ही नहीं, बल्कि स्वप्न और कल्पना भी है। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से आचरण की संस्कृति से विचार की संस्कृति की ओर बढ़ने की राह दिखाई है। दिनकर पुस्तकालय के पूर्व अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने कहा कि सिमरिया और आसपास के बच्चे जब दिनकर की कविता धारा प्रवाह सुनाते हैं, तब इस आयोजन की सार्थकता सिद्ध होती है। शिक्षक अमर कुमार मुरारी और जितेंद्र झा ने भी अपने विचार रखे।इस अवसर पर रीति कश्यप, आर्यन कुमार और अमन कुमार ने दिनकर की रचनाओं का पाठ किया। स्वागत भाषण संजीव फिरोज ने दिया, जबकि मंच संचालन दिनकर स्मृति विकास समिति के संयुक्त सचिव विनोद बिहारी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन दीनबंधु कुमार ने प्रस्तुत किया।कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया, तत्पश्चात राष्ट्रकवि दिनकर के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।

    राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के विचारों पर चर्चा

    विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने दिनकर के साहित्यिक अवदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। जनवादी लेखक संघ के प्रदेश सचिव कुमार विनीताभ ने दिनकर को समतामूलक समाज का सबसे बड़ा गायक कवि बताते हुए कहा कि उनकी दृष्टि प्रगतिशील थी। उन्होंने रश्मिरथी को आधुनिक भारत के लिए आदर्श ग्रंथ निरूपित किया। यह ग्रंथ आज भी सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा की स्थापना के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। बीएचयू के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रामाज्ञा शशिधर ने दिनकर के प्रशासनिक योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि भारत सरकार के हिंदी सलाहकार के रूप में उन्होंने हिंदी के विकास में अहम योगदान दिया। उन्होंने दिनकर को नई संस्कृति का निर्माता बताते हुए कहा कि बड़ा लेखक नई संस्कृति का नया फूल खिलाता है। दिनकर की रचनाओं में स्मृति के साथ स्वप्न और कल्पना का अद्भुत समन्वय है जो पाठक को आचरण की संस्कृति से विचार की संस्कृति की ओर ले जाती है।

    राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर

    दिनकर पुस्तकालय के पूर्व अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने स्थानीय बच्चों द्वारा दिनकर की कविताओं के धारा प्रवाह पाठ को इस आयोजन की सार्थकता का प्रमाण बताया। कार्यक्रम में रीति कश्यप, आर्यन कुमार और अमन कुमार ने दिनकर की ओजस्वी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वागत भाषण संजीव फिरोज ने दिया, मंच संचालन विनोद बिहारी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन दीनबंधु कुमार ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और दिनकर के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

    इस अवसर पर रंगकर्मी राधे कुमार, वार्ड सदस्य सूरज कुमार, अजीत कुमार, कुंदन कुमार मिश्रा, मंजुला कुमारी सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल एक महाकवि को श्रद्धांजलि है, बल्कि ग्रामीण परिवेश में उच्चस्तरीय साहित्यिक विमर्श की परंपरा को जीवंत रखने का एक सफल प्रयास भी है। दिनकर की कविताओं में निहित राष्ट्रवाद, शौर्य और सामाजिक न्याय के स्वर आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। रामधारी सिंह दिनकर के जीवन दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजनों की निरंतरता आवश्यक है।

    118वीं जयंती बेगूसराय रामधारी सिंह दिनकर सिमरिया हिंदी साहित्य
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