लेखक: राजेश कुमार
खोदावंदपुर में गणेश चतुर्थी, चौरचन और तीज पर्व का विशेष महत्व
बेगूसराय जिले के खोदावंदपुर प्रखंड में सोमवार को धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला जब एक साथ तीन प्रमुख पर्वों का आयोजन हुआ। इस दौरान पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा और श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। गणेश चतुर्थी, चौरचन और तीज पर्व को लेकर दिखा उत्साह का माहौल ग्रामीण भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का जीवंत प्रमाण है।
खोदावंदपुर प्रखंड क्षेत्र में सोमवार को गणेश चतुर्थी, चौरचन एवं हरतालिका तीज का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया. तीनों पर्वों को लेकर सुबह से ही क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा. पूजा-अर्चना एवं प्रसाद की तैयारी के साथ ही चौक-चौराहों और बाजारों में खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ देखी गयी. गणेश चतुर्थी एवं चौरचन को लेकर श्रद्धालुओं ने फल, दूध एवं अन्य पूजा सामग्रियों की जमकर खरीदारी की. पर्व के कारण फलों की कीमतों में उछाल देखने को मिला, वहीं दूध की किल्लत से भी लोगों को दो-चार होना पड़ा. ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य दिनों में 40 से 50 रुपये प्रति लीटर मिलने वाला दूध सोमवार को 80 से 90 रुपये प्रति लीटर तक बिका. इसके बावजूद श्रद्धालुओं ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार पूजा एवं प्रसाद की सामग्री की खरीदारी की. महिलाएं अहले सुबह पवित्र स्नान कर नये वस्त्र धारण कर पूजा-अनुष्ठान की तैयारी में जुट गयी. कई महिलाओं ने दिनभर निराहार रहकर गणेश चतुर्थी के लिए पारंपरिक प्रसाद तैयार किया. शाम में श्रद्धालुओं ने उदयाचल चंद्रमा को अर्घ अर्पित कर विधिवत पूजा-अर्चना की. इसके बाद परिवार एवं परिजनों के साथ प्रसाद ग्रहण किया गया.
बाजार पर पर्वों का आर्थिक प्रभाव और खरीदारी की होड़
पर्व के अवसर पर स्थानीय बाजारों में जबरदस्त रौनक रही। पूजा सामग्री, फल-फूल और मिठाइयों की दुकानों पर सुबह से ही लंबी कतारें लगी रहीं। दूध की कीमतों में दोगुनी वृद्धि होने के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। यह स्थिति दर्शाती है कि ग्रामीण समाज में आस्था के आगे आर्थिक बाधाएं गौण हो जाती हैं। फलों के दामों में आए उछाल ने विक्रेताओं को जहां लाभ पहुंचाया, वहीं आम खरीदारों को जेब ढीली करनी पड़ी। प्रशासन की ओर से भी भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए समुचित प्रबंध किए गए थे।
हरतालिका तीज पर सुहागिनों का अखंड व्रत
वहीं दूसरी ओर हरतालिका तीज को लेकर सुहागिन महिलाओं में विशेष उत्साह देखा गया. महिलाओं ने अपने अखंड सुहाग, पति की दीर्घायु एवं परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ मां पार्वती एवं भगवान शिव की आराधना की. सोमवार की रात महिलाओं ने जागरण कर भजन-कीर्तन एवं धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया, जिससे पूरे क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना रहा. तीज व्रत को लेकर कई स्थानों पर रातभर भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा. मंगलवार की सुबह ब्राह्मण भोजन एवं पारण के साथ तीज व्रत का अनुष्ठान संपन्न हुआ. दोनों पर्वों के अवसर पर प्रखंड क्षेत्र में दिनभर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा.
सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
हरतालिका तीज का यह पर्व महिलाओं की आस्था और सहनशक्ति का प्रतीक है। निर्जला व्रत रखकर महिलाएं पूरी रात जागरण करती हैं और भजन-कीर्तन के माध्यम से अपनी भक्ति व्यक्त करती हैं। इस दौरान गांव की महिलाएं एकत्रित होकर सामूहिक रूप से पूजा करती हैं, जिससे सामाजिक समरसता मजबूत होती है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापना और चौरचन पर्व पर चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा वैदिक संस्कृति की झलक प्रस्तुत करती है। गणेश चतुर्थी के बारे में अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया देख सकते हैं। इन पर्वों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
समापन के साथ ही श्रद्धालुओं के चेहरों पर संतुष्टि और प्रसन्नता का भाव स्पष्ट झलक रहा था। मंगलवार सुबह पारण के साथ ही व्रत का विधिवत समापन हुआ और प्रसाद वितरण के साथ पर्व का समापन हुआ। खोदावंदपुर प्रखंड का यह आयोजन बिहार की ग्रामीण संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश करता है जहां परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत मेल देखने को मिलता है। आशा है आने वाले वर्षों में भी इसी प्रकार श्रद्धा और उत्साह का यह क्रम अनवरत जारी रहेगा।

