लेखक: राष्ट्र संवाद ब्यूरो
बेगूसराय में खाद खरीदने की प्रक्रिया ऑनलाइन बुकिंग में समय लगने से किसान परेशान हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद से ही किसानों को तमाम तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे समय पर खाद नहीं मिल पा रहा है।
खाद खरीदने की प्रक्रिया ऑनलाइन बुकिंग में आ रहीं दिक्कतें
खाद लेने पहुंचे किसानों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन एवं बुकिंग की नई व्यवस्था में समय लगने से परेशानी हो रही है। 1 सितंबर से पोस मशीन के स्थान पर लागू व्यवस्था में आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर ओटीपी के जरिए खाद खरीदने से पहले ऑनलाइन बुकिंग करना जरूरी है। मोबाइल नंबर बदल जाने, ओटीपी नहीं आने और सर्वर धीमा रहने से किसान खाद दुकानों पर खाद खरीदने के लिए बुकिंग का इंतजार करने को मजबूर हैं।
गौरा-1 के किसान ब्रजकिशोर चौधरी समेत मघुरापुर के कई किसान पुरानी ब्लॉक तेघड़ा स्थित अमर एग्रो एजेंसी पर रजिस्ट्रेशन के इंतजार में बैठे थे। किसानों ने बताया कि फिलहाल मक्का की फसल में यूरिया और टमाटर, बैंगन मिर्ची के अलावे विभिन्न तरह के सब्जी के खेतों में डीएपी-पोटाश की जरूरत है। ऑनलाइन बुकिंग में अधिक समय लगने से खाद मिलने में देरी हो रही है।
विक्रेताओं और किसानों की मुश्किलें बढ़ीं
खाद विक्रेता अमरजीत कुमार ने बताया कि सर्वर और ओटीपी की समस्या के कारण प्रक्रिया पूरी करने में समय लग रहा है। छोटे और सीमांत किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं होने से उन्हें ऑनलाइन खाद बुकिंग के लिए बाहर से सुविधा लेनी पड़ रही है, जिससे उनका खर्च भी बढ़ रहा है और समय भी बर्बाद हो रहा है।
किसानों ने कहा कि रबी फसल की बुवाई के समय खाद की मांग बढ़ेगी और दुकानों पर भीड़ भी अधिक होगी। ऐसे में व्यवस्था को पहले से सुचारु करना जरूरी है, ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके।
डिजिटल व्यवस्था के व्यावहारिक पहलुओं पर उठे सवाल
केंद्र सरकार द्वारा उर्वरक वितरण में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से पोस मशीन की जगह आधार आधारित ओटीपी व्यवस्था शुरू की गई है। हालांकि, जमीनी स्तर पर इस खाद खरीदने की प्रक्रिया ऑनलाइन बुकिंग के क्रियान्वयन में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। ग्रामीण इलाकों में खराब नेटवर्क कनेक्टिविटी और सर्वर डाउन होने की समस्या आम है। इसके अलावा, बड़ी संख्या में छोटे किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं है या वे डिजिटल साक्षर नहीं हैं, जिसके कारण वे बिचौलियों या साइबर कैफे संचालकों पर निर्भर हो रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि व्यवस्था को किसान हितैषी बनाने के लिए ऑफलाइन विकल्प या हेल्प डेस्क की व्यवस्था दुकान स्तर पर सुनिश्चित की जानी चाहिए। पीआईबी की रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार लगातार उर्वरक उपलब्धता पर नजर रख रही है, लेकिन अंतिम छोर तक वितरण सुगम बनाने के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना अनिवार्य है।
आगामी रबी सीजन के लिए तैयारी जरूरी
आगामी रबी सीजन में गेहूं, चना, सरसों आदि फसलों की बुवाई के लिए यूरिया, डीएपी और एनपीके की मांग में भारी इजाफा होगा। यदि अभी से सर्वर क्षमता नहीं बढ़ाई गई और ओटीपी डिलीवरी की समस्या दूर नहीं की गई, तो पीक सीजन में किसानों के लिए संकट और गहरा सकता है। जिला कृषि पदाधिकारी स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग और दुकानदारों को तकनीकी प्रशिक्षण देने से इस समस्या का काफी हद तक समाधान संभव है।
किसान संगठन मांग कर रहे हैं कि आधार लिंक मोबाइल नंबर अपडेट कराने के लिए कैंप लगाए जाएं और जिन किसानों के पास फोन नहीं है, उनके लिए बायोमेट्रिक अथवा वैकल्पिक सत्यापन की व्यवस्था हो। तभी खाद खरीदने की प्रक्रिया ऑनलाइन बुकिंग वास्तव में किसानों के लिए वरदान साबित होगी, अन्यथा यह उनके लिए परेशानी का सबब बनी रहेगी।

