गंगा खतरे के निशान से 1.52 मीटर ऊपर, 269 नावें राहत-बचाव में तैनात; 57 मेडिकल कैंप और एक बोट एम्बुलेंस सक्रिय
संवाद सूत्र, भगवानपुर (बेगूसराय)। जिले में गंगा के बढ़े जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। जिले के आठ प्रखंडों की 39 पंचायतों के 189 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। करीब 95,245 परिवार और 3.80 लाख आबादी प्रभावित हुई है। प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज करते हुए प्रभावित लोगों तक भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने का दावा किया है।
गंगा खतरे के निशान से 1.52 मीटर ऊपर: जलस्तर 43.28 मीटर पहुंचा
बुधवार को भगवानपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री सह बेगूसराय के प्रभारी मंत्री रामकृपाल यादव ने बाढ़ की स्थिति और प्रशासन की ओर से किए जा रहे राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 41.76 मीटर से बढ़कर 43.28 मीटर पर पहुंच गया है। हालांकि, यह अब तक दर्ज किए गए उच्चतम जलस्तर 43.52 मीटर से अभी नीचे है।
269 नावों से पहुंचाई जा रही राहत
बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवागमन और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 269 नावों का परिचालन किया जा रहा है। इनमें 23 सरकारी और 246 निजी नाव शामिल हैं। बछवाड़ा, तेघड़ा, मटिहानी और शाम्हो में एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं, जबकि बलिया में एनडीआरएफ की टीम राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है। प्रशासन के अनुसार जिले के सभी तटबंध फिलहाल सुरक्षित हैं और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।
180 सामुदायिक रसोई में भोजन
बाढ़ पीड़ितों के लिए जिले में 180 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इन रसोई के माध्यम से अब तक 4,01,467 थालियों में भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है। जिन परिवारों के घर बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए हैं, उन्हें अस्थायी आवास के लिए 25,357 पॉलीथीन शीट वितरित की गई हैं। प्रशासन के पास अभी 41,880 पॉलीथीन शीट उपलब्ध हैं।
पेयजल और स्वच्छता पर भी जोर
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता और पेयजल की समस्या से निपटने के लिए 45 अस्थायी शौचालय संचालित किए जा रहे हैं। वहीं, प्रभावित इलाकों में 31 नए चापाकल लगाए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
57 मेडिकल कैंप, 14 हजार से अधिक लोगों का इलाज
बाढ़ के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने के लिए 57 मेडिकल कैंप और एक बोट एम्बुलेंस संचालित की जा रही है। इन शिविरों में अब तक 14,545 लोगों का इलाज किया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है।
पशुधन की सुरक्षा के लिए 38 पशु चिकित्सा कैंप
38 पशु चिकित्सा कैंप भी चलाए जा रहे हैं। इनमें अब तक 4,236 पशुओं का उपचार किया गया है। पशुपालकों के बीच 1,280.31 क्विंटल पशु चारा वितरित किया जा चुका है।
27 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित
बाढ़ ने जिले के कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। अब तक 27,034 हेक्टेयर कृषि रकबा प्रभावित होने की जानकारी दी गई है। इनमें 19,504 हेक्टेयर भूमि में 33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति का आकलन किया गया है। इससे किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान की आशंका है।
हर प्रभावित परिवार तक राहत पहुंचाने का दावा
प्रभारी मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में जिला प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटा है। प्रभावित लोगों को भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार और प्रशासन का प्रयास है कि बाढ़ प्रभावित प्रत्येक परिवार तक समय पर राहत पहुंचाई जाए।
प्रेस वार्ता के दौरान स्थानीय विधायक सह पूर्व मंत्री सुरेंद्र मेहता, भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव वर्मा सहित भाजपा के अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।

