स्वतंत्रता दिवस पर AECS जादूगोड़ा में बच्चों के हाथ खाली, न मिठाई मिली न बिस्कुट 56 साल की परंपरा टूटी, सवालों के घेरे में प्रबंधन
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा देश जब 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब परमाणु ऊर्जा नगरी जादूगोड़ा के प्रतिष्ठित *परमाणु ऊर्जा केंद्रीय विद्यालय (AECS) के 1200 बच्चों के चेहरे पर मायूसी थी।
ध्वजारोहण का उत्साह तो था, लेकिन तिरंगे को सलामी के बाद बच्चों को न मिठाई मिली, न बिस्कुट, न चॉकलेट और न चिप्स। 1970 से चली आ रही 56 साल पुरानी परंपरा इस बार पहली बार टूट गई। अब सवाल ये है — इस लापरवाही के जिम्मेदार कौन?
बारिश के बाद टूट गई उम्मीद
15 अगस्त 2026 को प्राचार्य रामदास वासुदेव ने ध्वजारोहण किया। कक्षा 1 से 12 तक के बच्चे पूरे जोश के साथ शामिल हुए। लेकिन ध्वजारोहण के तुरंत बाद बारिश शुरू हो गई। बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए कार्यक्रम बीच में ही स्थगित करना पड़ा और सभी को छुट्टी दे दी गई।

अभिभावकों और बच्चों को उम्मीद थी कि मौसम साफ होने पर स्कूल द्वारा मिठाई और नाश्ता बाद में वितरित किया जाएगा। लेकिन जब कुछ नहीं आया तो नाराजगी फूट पड़ी।
“सामग्री ही नहीं मंगाई गई” — सामने आई चौंकाने वाली जानकारी
सूत्रों के अनुसार इस वर्ष 15 अगस्त के लिए बच्चों के बीच वितरित होने वाली खाद्य सामग्री विद्यालय प्रबंधन द्वारा मंगाई ही नहीं गई थी।
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि 1970 से लेकर 2025 तक और जनवरी 2026 के गणतंत्र दिवस पर भी बच्चों को मिठाई, बिस्कुट, चॉकलेट और चिप्स दिया जाता रहा है। हर बार लगभग ₹40-45 प्रति बच्चे का बजट रखा जाता था। लेकिन इस बार 15 अगस्त 2026 को पहली बार बच्चे खाली हाथ घर लौटे।
प्रबंधन का पक्ष और नए सवाल
जब मामला तूल पकड़ा तो स्कूल प्रबंधन की ओर से कहा गया कि “जेम पोर्टल पर ऑर्डर दिया गया था, लेकिन सप्लायर ने 14 अगस्त को सामान देने से मना कर दिया।”
वहीं कुछ विद्यार्थियों का कहना है कि प्राचार्य ने बच्चों से इसको लेकर क्षमा भी मांगी और कहा कि “सामान आने पर वितरित कर दिया जाएगा।”
लेकिन अभिभावकों का सवाल है — अगर ऑर्डर दिया था तो वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? राष्ट्रीय पर्व की तैयारी अंतिम दिन तक क्यों लटकाई गई?
स्कूल की बिगड़ती व्यवस्था पर भी उठे सवाल
अभिभावकों ने सिर्फ चॉकलेट-बिस्कुट का मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि स्कूल की समग्र स्थिति पर भी नाराजगी जताई।
1. शिक्षकों की कमी: लगातार शिक्षकों के पद खाली हैं
2. लैब असिस्टेंट नहीं: लैब प्रैक्टिकल प्रभावित हो रहे हैं
3. रिजल्ट गिरावट: बोर्ड और आंतरिक परीक्षा का परिणाम लगातार खराब हो रहा है
4. प्रबंधन में बदलाव: नए प्राचार्य रामदास वासुदेव करण के आने के बाद से व्यवस्था बिगड़ने का आरोप
इस संबंध में अभिभावकों ने UCL कमांडर से भी शिकायत की है।
राष्ट्र पर्व पर बच्चों की खुशी से खिलवाड़?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 15 अगस्त और 26 जनवरी केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं हैं। इन दिनों बच्चों को मिठाई देना, उन्हें देशभक्ति से जोड़ना और उनमें उत्साह भरना स्कूल प्रबंधन की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है।
देशभर के स्कूलों में इस दिन जश्न मनाया जाता है, ऐसे में UCIL जैसी प्रतिष्ठित संस्था द्वारा संचालित AECS में इस चूक ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मांग: हो निष्पक्ष जांच
अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि:
1. इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और तय हो कि लापरवाही किस स्तर पर हुई
2. बच्चों को बकाया मिठाई-बिस्कुट अविलंब वितरित किए जाएं
3. भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए जवाबदेही तय की जाए
अब सबकी निगाहें UCIL प्रबंधन और AECS प्रशासन पर हैं। देखना होगा कि 56 साल पुरानी परंपरा टूटने के बाद प्रबंधन क्या सफाई देता है और बच्चों के चेहरे पर खोई हुई मुस्कान कब लौटती है।
“स्वतंत्रता दिवस बच्चों के लिए जश्न का दिन है। उस दिन उनके हाथ खाली रहना, देशभक्ति के उत्सव पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न है।”

