रेंगकर जलमीनार से लाती है पानी, बैटरी व्हीलचेयर के सहारे सपनों को उड़ान देना चाहती है मालती सिंह
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा: देश को यूरेनियम की आपूर्ति करने वाली यूसील (यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) से सटे गांव लिपिघुटू में रहने वाली 25 वर्षीय दिव्यांग युवती मालती सिंह आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कठिन जीवन जीने को मजबूर है। जन्म से दोनों पैरों से दिव्यांग मालती का हौसला बुलंद है, लेकिन व्यवस्था की अनदेखी ने उसकी राहें मुश्किल बना दी हैं।
मालती रोजमर्रा के सभी काम खाना बनाना, घर का काम और जलमीनार से पानी लाना रेंगकर करती है। वह बताती है कि पिछले 25 वर्षों से उसकी मां ही उसका सबसे बड़ा सहारा हैं। आर्थिक तंगी और शारीरिक असुविधाओं के बावजूद उसने कभी हार नहीं मानी।
मालती का कहना है कि सरकार से मिलने वाली एक हजार रुपये की दिव्यांग पेंशन ही उसकी आजीविका का एकमात्र सहारा है। रहने के लिए कच्चा घर है, जो बरसात में टपकता है। पूर्व में सरकार की ओर से मिली व्हीलचेयर अब पूरी तरह टूट चुकी है, जिससे उसकी परेशानी और बढ़ गई है।
मालती की सबसे बड़ी इच्छा है कि सरकार उसे बैटरी संचालित व्हीलचेयर उपलब्ध कराए, ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके और अपने सपनों को नई उड़ान दे सके। उनका कहना है कि यदि यह सुविधा मिल जाए तो वह अपने जीवन को बेहतर बनाने के साथ समाज में भी अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की नजर इस दिव्यांग युवती की ओर कब जाती है और उसके सपनों को साकार करने के लिए कब ठोस पहल की जाती है।

