नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो डिलीट करने के लिए मेटा को आखिरकार माफी मांगने मजबूर होना पड़ा है. संसदीय समिति की तरफ से मेटा को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया था. वहीं मेटा ने 24 घंटे के अंदर माफी मांग ली है. मेटा के एक बड़े एग्जीक्यूटिव जोएल कपलान ने आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से अपनी कंपनी की ओर से पीएम मोदी की पोस्ट पर रोक लगाने के लिए माफी मांगी.
मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान ने कहा, मैंने पीएम मोदी की पोस्ट पर रोक लगाने की गलती के लिए मेटा की ओर से मंत्री से माफी मांगी. भारत ने मंगलवार, 4 अगस्त को मेटा के शीर्ष अधिकारियों को समन भेजा था और 48 घंटे के अंदर दिल्ली आने के लिए कहा था. बता दें कि भारत मेटा का सबसे बड़ा मार्केट है. यहां करोड़ों लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं.
सोमवार को कम्युनिकेशन और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पर बनी संसदीय स्थायी समिति के चेयरमैन निशिकांत दुबे ने कहा था कि मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक रील को कुछ समय के लिए हटाने के लिए माफी मांगनी चाहिए. निशिकांत दुबे ने यह भी कहा था कि अगर मेटा ने माफी नहीं मांगी तो इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) एक्ट की धारा 79 के तहत इंटरमीडियरी (मध्यस्थों) को मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा खत्म कर दी जाएगी.
पीएम मोदी का वीडियो किया था डिलीट
पीएम मोदी ने 23 जुलाई को सोशल मीडिया पर एक वर्टिकल वीडियो पोस्ट किया था. इस वीडियो को मेटा के फेसबुक और इंस्टाग्राम से कुछ समय के लिए हटा दिया गया था, लेकिन बाद में इसे वापस बहाल कर दिया गया. यूएस में हेडक्वार्टर वाली इस सोशल मीडिया कंपनी ने इस घटना के लिए तकनीकी खराबी को जिम्मेदार ठहराया और माफी मांगी.
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को मेटा का यह स्पष्टीकरण नाकाफी लगा. कंपनी ने कहा कि कंटेंट गलती से हटाया गया था और उसे प्लेटफॉर्म पर वापस बहाल कर दिया गया. निशिकांत दुबे ने कहा, प्रधानमंत्री का वीडियो हटाना किसी मध्यस्थ का काम नहीं, बल्कि एक पब्लिशर का काम था. इसके लिए जुकरबर्ग को माफी मांगनी होगी.

