जयदा शिव मंदिर में गूंजा हर-हर गंगे का जयघोष, सुवर्णरेखा तट पर पहली बार भव्य गंगा महाआरती का आयोजन
राष्ट्र संवाद संवाददाता
चांडिल: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल स्थित ऐतिहासिक जयदा शिव मंदिर परिसर रविवार की शाम भक्ति और आस्था के रंग में पूरी तरह सराबोर नजर आया। सुवर्णरेखा नदी के तट पर श्री श्याम सेवा समिति की ओर से आयोजित भव्य गंगा महाआरती में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। करीब पांच हजार श्रद्धालुओं की मौजूदगी में पूरा मंदिर परिसर और नदी घाट दीपों की रोशनी से जगमगा उठा।

शाम करीब छह बजे विधिवत गंगा पूजन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महाआरती का शुभारंभ हुआ। वाराणसी से विशेष रूप से आमंत्रित पांच विद्वान पंडितों ने पारंपरिक शैली में शंखनाद, घंटियों की मधुर ध्वनि और वैदिक मंत्रों के बीच मां गंगा की आरती संपन्न कराई। आरती के दौरान पूरा वातावरण “हर-हर महादेव” और “हर-हर गंगे” के जयघोष से गूंज उठा, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

जयदा शिव मंदिर से लेकर सुवर्णरेखा नदी घाट तक आकर्षक विद्युत सज्जा और दीपों की रोशनी ने कार्यक्रम को भव्य स्वरूप प्रदान किया। वहीं जयदा मेला मैदान में भी बड़ी संख्या में लोग जुटे रहे। भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़ों और धार्मिक संगीत ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।

कार्यक्रम में शामिल श्रद्धालुओं ने कहा कि पहली बार जयदा में इस तरह की भव्य गंगा महाआरती देखने का अवसर मिला। उन्हें ऐसा महसूस हुआ मानो वाराणसी के प्रसिद्ध गंगा घाटों पर आयोजित होने वाली आरती का साक्षात दर्शन कर रहे हों।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। चांडिल थाना प्रभारी संतन तिवारी और चौका थाना प्रभारी गौरव कुमार स्वयं पुलिस बल के साथ पूरे कार्यक्रम के दौरान मौजूद रहे। नदी घाट पर किसी भी संभावित हादसे से बचाव के लिए स्थानीय गोताखोरों की भी तैनाती की गई थी।
श्री श्याम सेवा समिति के स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण, यातायात नियंत्रण और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली। समिति के सदस्यों ने पूरे आयोजन के दौरान लोगों की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा।
आयोजकों ने बताया कि जयदा शिव मंदिर और सुवर्णरेखा तट को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण पहल है। भविष्य में भी इसी प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि क्षेत्र की धार्मिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सके।

