लेखक: इंद्र यादव
ठाणे में शुरू हुई ‘मराठी पाठशाळा’: एक अनूठी सामाजिक पहल
महाराष्ट्र के ठाणे शहर में रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी भाषा से जोड़ने के लिए एक अभिनव अभियान ‘मराठी पाठशाळा’ की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य चालकों को मराठी भाषा में संवाद, सही उच्चारण, लेखन और व्यवहारिक बोलचाल का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्थानीय संस्कृति का अविभाज्य हिस्सा बनाना है। ‘आपली भाषा, आपली ओळख’ यानी अपनी भाषा, अपनी पहचान के नारे के साथ यह कार्यक्रम सामाजिक समरसता और भाषाई गौरव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
‘मराठी पाठशाळा’ का आयोजन और वरिष्ठ मार्गदर्शन
महाराष्ट्र में मराठी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ठाणे शहर में रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए ‘मराठी पाठशाळा’ की शुरुआत की गई है। ‘आपली भाषा, आपली ओळख’ के नारे के साथ शुरू हुए इस अभियान में चालकों को मराठी भाषा में संवाद, सही उच्चारण, लेखन और व्यवहारिक बोलचाल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस पहल का आयोजन पूर्व नगरसेवक राजकुमार रामनयन यादव और समाजसेवक महेंद्र सोडारी के नेतृत्व में किया जा रहा है। अभियान को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक सहित कई जनप्रतिनिधियों का मार्गदर्शन प्राप्त है।
‘मराठी पाठशाळा’ का उद्देश्य और विस्तृत पाठ्यक्रम
कार्यक्रम के दौरान रिक्शा और टैक्सी चालकों की मराठी भाषा दक्षता का आकलन करने के लिए विशेष संवाद अभ्यास और इंटरव्यू आयोजित किए गए। उन्हें यात्रियों के साथ दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले मराठी संवादों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया, ताकि वे स्थानीय यात्रियों से सहज और सम्मानजनक तरीके से संवाद कर सकें।
प्रशिक्षण में यात्रा शुरू करने, मीटर चालू करने, दिशा पूछने, ऑनलाइन या नकद भुगतान स्वीकार करने तथा अन्य सामान्य परिस्थितियों में उपयोग होने वाले मराठी वाक्यों का अभ्यास कराया गया। आयोजकों ने हिंदी और मराठी दोनों भाषाओं के माध्यम से संवाद को सरल बनाकर समझाया।
पाठ्यक्रम को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है जिसमें ‘कसे आहात?’ (कैसे हो?), ‘कुठे जायचा आहे?’ (कहां जाना है?), ‘मीटर लावून घ्या’ (मीटर चालू करो), ‘ऑनलाइन पेमेंट स्वीकार आहे’ (ऑनलाइन भुगतान स्वीकार है) जैसे दैनिक उपयोग के वाक्य शामिल हैं। इससे चालकों का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे यात्रियों से बेहतर जुड़ाव महसूस कर रहे हैं।
आयोजकों की दृष्टि और सामाजिक प्रभाव
आयोजकों का कहना है कि इस पहल से न केवल मराठी भाषा का प्रचार-प्रसार होगा, बल्कि यात्रियों और चालकों के बीच बेहतर संवाद, आपसी सम्मान और विश्वास भी मजबूत होगा। स्थानीय नागरिकों और चालकों ने इस अभियान का स्वागत करते हुए इसे भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम बताया।
पूर्व नगरसेवक राजकुमार रामनयन यादव ने बताया कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति की वाहक है। जब एक चालक यात्री से उसकी मातृभाषा में बात करता है, तो एक अदृश्य सेतु का निर्माण होता है। समाजसेवक महेंद्र सोडारी ने कहा कि यह प्रशिक्षण चालकों के व्यावसायिकता में वृद्धि करेगा और उन्हें नागरिक समाज का सम्मानित हिस्सा बनाएगा।
चालकों और नागरिकों की उत्साहजनक प्रतिक्रिया
प्रशिक्षण सत्र में भाग लेने वाले रिक्शा चालक रमेश पाटिल ने कहा, “पहले मुझे मराठी बोलने में झिझक होती थी, लेकिन अब मैं यात्रियों से आत्मविश्वास से बात कर पाता हूं। यात्री भी खुश होते हैं।” एक अन्य टैक्सी चालक सुरेश जाधव ने बताया कि मीटर और भुगतान संबंधी मराठी वाक्य सीखने से उनका काम आसान हो गया है। स्थानीय नागरिक अनिता देशमुख ने कहा कि यह पहल ठाणे की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है।
भविष्य की योजनाएं और विस्तार
इस सफल शुरुआत के बाद आयोजकों की योजना ‘मराठी पाठशाळा’ को ठाणे के अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ महाराष्ट्र के अन्य महानगरों जैसे मुंबई, पुणे, नागपुर तक ले जाने की है। परिवहन विभाग के सहयोग से इसे एक नियमित प्रमाणन कार्यक्रम का रूप दिया जा सकता है, जिससे नए लाइसेंस धारकों के लिए मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान अनिवार्य हो सके।
अधिक जानकारी के लिए महाराष्ट्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट यहां देखें।

