धनबाद पुलिस का ‘अमानत’ बना उम्मीद की किरण, 505 लोगों को लौटे गुमशुदा मोबाइल
राष्ट्र संवाद संवादाता
पुलिस लाइन के नए AC सभागार में आयोजित हुआ भव्य कार्यक्रम.
CEIR पोर्टल पर तुरंत शिकायत की अपील
धनबाद पुलिस ने भरोसे और तकनीक की एक शानदार मिसाल पेश की है। पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष ‘अमानत कार्यक्रम’ के तहत शनिवार को 505 लोगों को उनके गुम या चोरी हुए मोबाइल फोन वापस लौटाए गए। जिन लोगों ने अपने फोन मिलने की उम्मीद पूरी तरह छोड़ दी थी, उनके चेहरों पर आज अपना फोन वापस पाकर फिर से मुस्कान लौट आई।
यह भव्य कार्यक्रम पुलिस लाइन में बने नवनिर्मित और अत्याधुनिक 500 लोगों की क्षमता वाले वातानुकूलित पुलिस सभागार में आयोजित किया गया। इस सभागार का औपचारिक उद्घाटन भी आज ही उपायुक्त आदित्य रंजन और वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में मौजूद उपायुक्त, डीएफओ, एसएसपी और ग्रामीण एसपी ने लोगों को उनके फोन लौटाए और आधुनिक दौर में मोबाइल की महत्ता पर प्रकाश डाला। अधिकारियों ने कहा कि आज के दौर में मोबाइल सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की डिजिटल पहचान बन चुका है। बैंकिंग, सरकारी योजनाएं, आधार-पैन, ऑनलाइन भुगतान, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सभी महत्वपूर्ण सेवाएं मोबाइल से जुड़ी हैं, इसलिए इसकी सुरक्षा बेहद जरूरी है।
इस मौके पर अधिकारियों ने आम जनता से अपील की कि मोबाइल गुम या चोरी होने पर घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत CEIR यानी Central Equipment Identity Register पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने बताया कि CEIR पर शिकायत दर्ज होते ही मोबाइल लॉक हो जाता है, जिससे कोई उसका गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता और पुलिस की तकनीकी टीम के लिए उसे ट्रेस करना आसान हो जाता है।
वहीं एसएसपी प्रभात कुमार ने एक बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को मोबाइल फोन की तलाश के दौरान एक अंतरराष्ट्रीय मोबाइल चोर गिरोह का पता चला है, जिसे जल्द ही पुलिस सलाखों के पीछे डालने वाली है। अधिकारियों ने लोगों को साइबर सुरक्षा को लेकर भी सतर्क किया और कहा कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और अनजान कॉल से सावधान रहें।
कुल मिलाकर, मोबाइल की इस सफल वापसी ने न सिर्फ आम जनता का पुलिस पर भरोसा मजबूत किया है, बल्कि ये भी साबित किया है कि सही तकनीक और पुलिस की प्रतिबद्धता से वर्षों पुरानी उम्मीदें भी सच हो सकती हैं। अमानत कार्यक्रम महज एक आयोजन नहीं, बल्कि पुलिस की जवाबदेही और तकनीक के प्रभावी उपयोग की एक मिसाल बनकर उभरा है।

