लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। गायत्री परिवार टाटानगर के युवा साथियों द्वारा रविवार को भालुबासा स्थित गायत्री ज्ञान मंदिर में गायत्री परिवार के दिवंगत परिजनों की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्रद्धा और भावपूर्ण वातावरण के बीच दिवंगत आत्माओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ, गायत्री परिवार झारखंड के मार्गदर्शक सच्चिदानंद प्रसाद उपस्थित रहे। वहीं सम्मानित अतिथियों में नीरज महतो, राजेंद्र कुमार लोधा एवं रेखा शर्मा शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत सभी दिवंगत परिजनों के निमित्त पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं ने दिवंगत आत्माओं को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रांतीय युवा समन्वयक संतोष कुमार राय ने दिवंगत परिजनों के परिवार से आए प्रतिनिधियों को अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम के उद्देश्य पर अमित कुमार वर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए ऐसे आयोजनों को परिवार एवं समाज में संस्कार और संवेदनाओं को सुदृढ़ करने वाला बताया।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रशांत कुमार कालिंदी ने किया। आयोजन को सफल बनाने में नवयुग दल एवं प्रज्ञा महिला मंडल टाटानगर के युवाओं की सक्रिय एवं सराहनीय भूमिका रही।
गायत्री ज्ञान मंदिर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा का उद्देश्य
इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन भालुबासा के गायत्री ज्ञान मंदिर में करने का मुख्य उद्देश्य उन सभी दिवंगत आत्माओं को आदर और सम्मान देना था, जिन्होंने अपने जीवनकाल में गायत्री परिवार के माध्यम से समाज सुधार और अध्यात्म के प्रसार में अमूल्य योगदान दिया था। युवाओं द्वारा की गई यह पहल समाज में एक नया संदेश देती है कि पुरानी पीढ़ी के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित सभी लोगों की आंखें नम थीं, लेकिन मन में इस बात का संतोष था कि दिवंगत आत्माओं के परिवार आज भी इस बड़े संगठन से जुड़े हुए हैं और उनके आदर्शों पर चल रहे हैं। गायत्री ज्ञान मंदिर में इस तरह के आयोजन नियमित रूप से किए जाते हैं ताकि समाज में नैतिक मूल्यों को जीवित रखा जा सके और युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ा जा सके।
युवा शक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व
आज के आधुनिक युग में जहां लोग अपने मूल संस्कारों को भूलते जा रहे हैं, वहीं टाटानगर के युवाओं ने इस श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। प्रांतीय युवा समन्वयक संतोष कुमार राय ने कहा कि युवाओं की यह सक्रियता सराहनीय है। जब युवा वर्ग अपनी सांस्कृतिक धरोहर और पूर्वजों के सम्मान के लिए आगे आता है, तो समाज की नींव और अधिक मजबूत होती है।
गायत्री ज्ञान मंदिर के इस पावन परिसर में उपस्थित सभी लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएंगे। समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने और रचनात्मक कार्यों को बढ़ावा देने में गायत्री परिवार के युवाओं की भूमिका हमेशा अग्रणी रही है।
सच्चिदानंद प्रसाद का मार्गदर्शन और प्रेरणा
मुख्य अतिथि सच्चिदानंद प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि गायत्री परिवार एक आध्यात्मिक परिवार है, जहां हर सदस्य एक-दूसरे से आत्मीयता से जुड़ा हुआ है। दिवंगत आत्माओं को याद करना और उनके परिवारों को सम्मानित करना इस आत्मीयता का सबसे सुंदर प्रमाण है। उन्होंने कहा कि गायत्री ज्ञान मंदिर केवल एक भवन नहीं है, बल्कि यह वह ऊर्जा केंद्र है जहां से समाज कल्याण की योजनाएं और संस्कार प्रवाहित होते हैं।
इस कार्यक्रम में भालुबासा और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। कार्यक्रम के अंत में सभी के लिए शांति पाठ किया गया और दिवंगत आत्माओं की सद्गति के लिए प्रार्थना की गई। ऐसे आयोजनों से समाज में शांति, सद्भावना और आपसी प्रेम का विस्तार होता है।
भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं पूर्वज
गायत्री परिवार के वरिष्ठ सदस्यों का मानना है कि जो समाज अपने पूर्वजों के योगदान का सम्मान नहीं करता, वह कभी प्रगति नहीं कर सकता। गायत्री ज्ञान मंदिर में आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा ने यह सिद्ध कर दिया है कि नई पीढ़ी अपने बुजुर्गों के प्रति गहरी संवेदना और आदर भाव रखती है। उपस्थित अतिथियों, जिनमें नीरज महतो, राजेंद्र कुमार लोधा और रेखा शर्मा शामिल थे, ने भी युवाओं के इस भगीरथ प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना की।
टाटानगर के नवयुग दल और प्रज्ञा महिला मंडल के समर्पित कार्यकर्ताओं ने दिन-रात मेहनत कर इस गरिमाइयी सभा को सफल बनाया। उनके इस निस्वार्थ प्रयास ने कार्यक्रम में उपस्थित हर व्यक्ति के हृदय को छू लिया। आने वाले समय में भी इस प्रकार के संस्कारवान और सामाजिक रूप से जागरूक कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जाता रहेगा ताकि राष्ट्र निर्माण में युवाओं का योगदान सुनिश्चित हो सके।

