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    Home » राखा कॉपर में फैक्ट्री लगाने के नाम पर पर्यावरण को पहुंचाया जा रहा है नुकसान अंधाधुन पेड़ कटाई और गार्डवाल को तोड़ा गया
    झारखंड सरायकेला-खरसावां

    राखा कॉपर में फैक्ट्री लगाने के नाम पर पर्यावरण को पहुंचाया जा रहा है नुकसान अंधाधुन पेड़ कटाई और गार्डवाल को तोड़ा गया

    Aman OjhaBy Aman OjhaJune 28, 2026No Comments3 Mins Read
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    भाजपा नेता ने दोषी पर कार्रवाई की मांग किया

     

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

     

    राखा कोपर जियाडा में फैक्ट्री लगाने के नाम पर आवंटित जमीन पर नियमों को ताक पर रख दिया गया है। जमशेदपुर से आए ठेकेदार सोहन साहू पर आरोप है कि उसने JIADA की आवंटित जमीन पर बिना वन विभाग या स्वर्ण रेखा परियोजना की अनुमति के JCB मशीन से दर्जनों जिंदा पेड़ उखाड़कर फेंक दिए। यहीं नहीं, वर्षों पूर्व स्वर्ण रेखा परियोजना द्वारा नदी किनारे बाढ़ रोकने के लिए बनाए गए गार्ड वाल को भी काटकर उसके पत्थर अपने निजी इस्तेमाल के लिए निकाल लिए गए।

     

    *क्या है पूरा मामला?*

    स्थानीय लोगों के अनुसार, JIADA से फैक्ट्री लगाने के लिए जमीन आवंटित होने के बाद ठेकेदार सोहन साहू ने 3 दिन पहले साइट पर काम शुरू किया। आरोप है कि प्लॉट समतल करने के नाम पर सबसे पहले वहां लगे 15-20 साल पुराने जिंदा पेड़ों को JCB से जड़ समेत उखाड़ दिया गया। इसके बाद प्लॉट की बाउंड्री बढ़ाने के लिए सटी हुई स्वर्ण रेखा परियोजना की गार्ड वाल को गैस कटर से काटा गया और करीब 2 ट्रैक्टर पत्थर निकालकर निजी साइट पर ले जाए गए।

     

    *कौन-कौन से नियम टूटे?*

    1. *वन संरक्षण अधिनियम 1980*: बिना DFO की लिखित अनुमति के एक भी जीवित पेड़ काटना/उखाड़ना गैर-कानूनी है। दोषी को 6 माह जेल या 10 हजार प्रति पेड़ जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

    2. *सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984*: सरकारी निर्माण को नुकसान पहुंचाने पर 5 साल तक की सजा और संपत्ति की कीमत के बराबर जुर्माना। गार्ड वाल सरकारी संपत्ति है।

    3. *JIADA आवंटन नियम 2023 की धारा 12*: आवंटी को जमीन पर किसी भी निर्माण/तोड़फोड़ से पहले JIADA से NOC लेना अनिवार्य है। उल्लंघन पर आवंटन तत्काल रद्द किया जा सकता है।

    4. *झारखंड माइनर मिनरल कंसेशन रूल्स*: सरकारी पत्थर का निजी इस्तेमाल चोरी की श्रेणी में आता है, IPC 379 लागू होती है।

     

    *‘अनुमति किसने दी?’ — सवालों के घेरे में अधिकारी*

    स्वर्ण रेखा परियोजना के अधिकारी से जब भास्कर ने संपर्क किया तो उन्होंने कहा, “हमारे संज्ञान में ऐसा कोई आवेदन नहीं आया है। गार्ड वाल तोड़ने की अनुमति विभाग स्तर से नहीं दी गई है।

    *भाजपा नेता ने जताया विरोध, कहा- ‘अधिकारियों की मिलीभगत’*

    स्थानीय भाजपा के वरिष्ठ नेता मनोज प्रताप सिंह ने घटना पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा, “JIADA में जमीन आवंटन के नाम पर खुलेआम लूट मची है। अधिकारियों और कुछ स्थानीय नेताओं को ‘मलाई खिलाकर’ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। स्वर्ण रेखा का गार्ड वाल अगर बाढ़ में टूटा तो सैकड़ों घर डूबेंगे। इसका जिम्मेदार कौन होगा? हम मांग करते हैं कि ठेकेदार सोहन साहू पर तुरंत FIR हो, JIADA उसका आवंटन रद्द करे और जिन अधिकारियों की मिलीभगत है उनकी संपत्ति की जांच हो।” उन्होंने चेतावनी दी कि 48 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई तो भाजपा कार्यकर्ता DC कार्यालय में शिकायत करेंगी।।

    *स्थानीय लोगों में आक्रोश*

    आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि गार्ड वाल टूटने से बरसात में बस्ती में पानी घुसने का खतरा बढ़ गया है। “पेड़ों से ऑक्सीजन मिलती थी, अब धूल उड़ेगी। विकास के नाम पर विनाश मंजूर नहीं।

    इस मामले में कारोबारी सोहनलाल साहू से संपर्क साधने की प्रयास उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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