लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
गोरखपुर। लखनऊ के अलीगंज में घटित अग्निकांड में असमय काल के गाल में समाए 15 मानव जनों की हत्या के आरोप में लखनऊ विकास प्राधिकरण के साथ अग्निशमन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर उनके घर लखनऊ अग्निकांड में बुलडोजर न्याय किया जाना न केवल न्याय संगत वरन वक्त की जरूरत है। उक्त विचार वरिष्ठ अधिवक्ता रत्नाकर सिंह पत्रकार ने व्यक्त किया।
लखनऊ अग्निकांड में बुलडोजर न्याय: अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
श्री सिंह ने कहा की आवासीय परिसरों में बिना अनुमति तथा बिना संबंधित विभागों की अनापत्ति लिए धड़ल्ले से व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही है। चंद चांदी के टुकड़ों पर विकास प्राधिकरण आंखें बंद कर लेते हैं और अग्निशमन विभाग भूल कर भी दबिश नहीं डालते, क्योंकि वह जानते हैं कि कुछ भी होगा तो दो-चार दिन की हाय तौबा के बाद सब शांत हो जाएंगे। यह वक्त अब ऐसे दानवों के विरुद्ध अंतिम प्रहार का है। एसआईटी अपना काम करती रहेगी। उन्होंने योगी जी से मांग किया कि एलडीए, अग्निशमन और विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के घर सबसे पहले बुलडोजर चले।
मानव जीवन का मूल्य और ‘जीरो टॉलरेंस’ को चुनौती
10 और 15 लाख रुपए मानव जीवन का मूल्य नहीं हो सकते हैं। श्री सिंह ने कहा कि यह मानने योग्य बात नहीं है कि बिना अनुमति तीन मंजिला भवन बन जाए, लिफ्ट लग जाए और लखनऊ विकास प्राधिकरण को पता भी ना चले। जिसमें तमाम तरह की व्यावसायिक गतिविधियों के साथ कोचिंग क्लासेस भी चल रही हों और अग्निशमन विभाग आंखें बंद किए बैठा हो? मात्र 20 केवी की बिजली ली गई हो और 35 केवी से अधिक खर्च किया जा रहा हो और विद्युत विभाग चांदी की चमक में चौंधियाया शांत बैठा रहे? यह सबकी मिली भगत है और सीधे मुख्य मंत्री योगी के जीरो टॉलरेंस को चुनौती है। ऐसे में जब तक छोटे शिकारों को छोड़ मगरमच्छ सरीखे बड़े अपराधियों को नहीं पकड़ा जाएगा, तब तक इस प्रकार बच्चे और आम जनता आग में झुलस कर अपने प्राणों को गंवाते रहेंगे और इस प्रकार के मकान लाक्षागृह बनकर विकराल तांडव करते रहेंगे।
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इस गंभीर मामले पर अधिक जानकारी के लिए, आप उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट यहां देख सकते हैं।

