राष्ट्र संवाद संवाददाता
कुकड़ू प्रखंड के मौजा सपादा में प्रस्तावित बालू घाट संचालन को लेकर आयोजित ग्राम सभा में ग्रामीणों ने कड़ा विरोध जताया। ग्राम प्रधान बासुदेव सिंह मुंडा की अध्यक्षता तथा कुकड़ू अंचल अधिकारी अभय द्विवेदी की उपस्थिति में हुई बैठक में ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि बालू घाट क्षेत्र का सीमांकन होने तक किसी भी प्रकार का बालू उठाव नहीं होने दिया जाएगा।
बैठक में जिला खनन विभाग की ओर से ई-नीलामी के माध्यम से चयनित एजेंसी गो-क्वेस्ट सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता द्वारा घाट संचालन के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम सभा की सहमति और स्थानीय लोगों की चिंताओं को पर्याप्त महत्व दिए बिना प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
ग्राम सभा में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। ग्रामीणों ने मांग की कि भौतिक सत्यापन एवं ग्राम सभा की सहमति से सीमांकन होने के बाद ही बालू उठाव की अनुमति दी जाए। मशीनों से बालू खनन पर रोक लगाते हुए केवल श्रमिकों के माध्यम से बालू निकासी की अनुमति देने की मांग की गई, ताकि स्थानीय लोगों का रोजगार प्रभावित न हो।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि घाट संचालन होने की स्थिति में स्थानीय मजदूरों को प्राथमिकता दी जाए तथा बाहरी लोगों की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। पर्यावरण संरक्षण को लेकर नदी किनारे 50 मीटर तक बालू उठाव प्रतिबंधित करने और खेतों को नुकसान से बचाने के लिए ट्रैक्टरों के लिए अलग मार्ग बनाने की मांग की गई। इसके अलावा बालू घाट से प्राप्त राजस्व का 25 प्रतिशत ग्राम विकास समिति को देने का प्रस्ताव भी रखा गया।
ग्राम प्रधान बासुदेव सिंह मुंडा ने कहा कि पेसा अधिनियम-1996 एवं झारखंड पंचायत राज अधिनियम के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की सहमति के बिना खनन कार्य नहीं किया जा सकता। अंचल अधिकारी अभय द्विवेदी ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों से जिला खनन पदाधिकारी और उपायुक्त को अवगत कराया जाएगा तथा सीमांकन और ग्राम सभा की लिखित सहमति के बिना खनन शुरू नहीं होगा।
वहीं, गो-क्वेस्ट सॉल्यूशन के प्रतिनिधि ने कहा कि कंपनी सभी कार्य नियमों के अनुरूप करेगी तथा स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि सीमांकन के लिए जल्द ही सर्वे टीम भेजी जाएगी।
बैठक में पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य, माझी बाबा, महिला समिति की सदस्याओं समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि मांगों की अनदेखी कर जबरन खनन शुरू किया गया तो आंदोलन किया जाएगा। इस अवसर पर सुधीर सिंह, पीताम्बर सिंघमंकी, पूर्व प्रमुख शंकर सिंह मुंडा, गौरांग प्रामाणिक सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।

