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    Home » यूसिल के खिलाफ ग्राम सभाओं का फूटा गुस्सा: अवैध वसूली, विस्थापितों के शोषण और प्रदूषण पर आंदोलन की चेतावनी
    झारखंड सरायकेला-खरसावां

    यूसिल के खिलाफ ग्राम सभाओं का फूटा गुस्सा: अवैध वसूली, विस्थापितों के शोषण और प्रदूषण पर आंदोलन की चेतावनी

    Aman OjhaBy Aman OjhaMay 15, 2026No Comments5 Mins Read
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    राष्ट्र संवाद संवाददाता

     

    पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा क्षेत्र में यूसिल प्रबंधन के खिलाफ स्थानीय ग्राम सभाओं का आक्रोश खुलकर सामने आया है. नांदूप और तुरामडीह ग्राम सभा के प्रतिनिधियों ने प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर विस्थापित एवं प्रभावित मजदूरों के साथ हो रहे अन्याय, अवैध वसूली और पर्यावरणीय समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

    ग्राम सभा नांदूप द्वारा दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि यूसिल के ठेकेदार द्वारा विस्थापित परिवारों के करीब 10 मजदूरों को बिना किसी ठोस कारण के काम से हटा दिया गया. ग्राम सभा का कहना है कि 18 मार्च 2026 को प्रबंधन द्वारा लिखित आश्वासन दिया गया था कि इन मजदूरों को पुनः काम पर बहाल किया जाएगा, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

    इसके साथ ही तुरामडीह यूसिल माइंस परिसर में कार्यरत मजदूरों से अवैध वसूली का भी गंभीर आरोप लगाया गया है।

    ग्रामीणों ने यूसिल कर्मी पिंटू चाकिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए वसूली का आरोप लगाया और लिखित शिकायतकी है।

    ग्राम सभा के अनुसार मजदूरों से प्रतिदिन लगभग 50 रुपये की अवैध कटौती की जा रही है और विरोध करने पर उन्हें काम से बैठा दिया जाता है।

    इस मुद्दे पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

    ज्ञापन में यह भी उल्लेख है कि यूसिल द्वारा खदान क्षेत्र में की जा रही ब्लास्टिंग के कारण पुराने नांदूप गांव के घरों में दरारें आ रही हैं. साथ ही खदान से निकलने वाली धूल और प्रदूषण के कारण ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. ग्राम सभा ने इन समस्याओं पर तत्काल रोक लगाने और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

    तुरामडीह ग्राम सभा ने यह भी मांग रखी है कि विस्थापित परिवारों को स्थायी रोजगार दिया जाए तथा पूर्व में भूमि अधिग्रहण के बदले लंबित रोजगार संबंधी वादों को जल्द पूरा किया जाए।

    ग्राम सभाओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर 7 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे यूसिल तुरामडीह माइंस के मुख्य द्वार पर आंदोलन करते हुए कार्य पूरी तरह ठप कर देंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।

    इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में तनाव का माहौल है और स्थानीय लोग प्रशासन एवं कंपनी प्रबंधन से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

     

    ग्राम सभाओं ने लगाया वर्षों से शोषण का आरोप

    दोनों ग्राम सभाओं के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि यूसिल प्रबंधन द्वारा वर्षों से स्थानीय विस्थापित और प्रभावित परिवारों का शोषण किया जा रहा है. लगातार उपेक्षा और समस्याओं के समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. इसी को देखते हुए ग्राम सभा के लोगों ने लिखित रूप से पूर्व जिला परिषद सदस्य बाघराय मार्डी से इस आंदोलन का नेतृत्व करने का आग्रह किया है तथा उनसे न्याय दिलाने की मांग की है।

    इस मामले में बाघराय मार्डी ने कहा है कि यूसिल में मजदूरों से किसी प्रकार की अवैध वसूली नहीं करने दी जाएगी और विस्थापितों को न्याय दिलाया जाएगा इसके लिए जल्द ही मुख्यमंत्री से मिला जाएगा।

    संयुक्त यूनियन के नेताओं ने भी बताया कि यूसिल के अधिकारियों के द्वारा ही पिंटू चाकिया को समर्थन दिया जाता है उनके समर्थन से ही वसूली की

    विस्थापितों और ठेका मजदूरों के द्वारा लगाए गए यूसिल कर्मी पिंटू चकिया पर गंभीर आरोप

    यूसिल कर्मचारी पिंटू चाकिया उर्फ मिंटू चाकिया द्वारा यूसिल प्रबंधन के साथ मिलकर विस्थापितों को रोजगार से वंचित रखना, बदले में उन्हें ठेका मुहैया यूसिल द्वारा करवाया जाता हे।

     

    किसी भी ठेका मजदूरों विस्थापित ग्रमीणों द्वारा यूसिल प्रबंधन से अपना हक व अधिकार मांगने से यूसिल प्रबंधन के इशारे पर चिंटू चाकिया के अधीन कार्यरत ठेका मजदूरों से विस्तापित ग्रामीणों को पिटवाना, मजदूर साथ नहीं देने से गेट पास छीन लेना।

     

    ठेका में काम करने के लिए प्रत्येक मजदूर से 50 से 60 हजार तक वसूली करने का गंभीर आरोप भी लगाया गया हे।

     

    ठेके मजदूरों द्वारा मासिक चंदा नहीं देने पर काम से बैठाना,

     

    यूसिल मैन गेट में यूसिल के लिए प्रतिदिन आपूर्ति ट्रक गाड़ियों से वसूली करना,

     

    विगत 13 वर्षों से एक दिन भी यूसिल तुरामडीह माइंस में बिना काम किए लगातार पूर्ण मासिक वेतन मिलना के मामले में जांच करने की मांग किया गया हे।

     

    हरेक साल जोहार नाईट नाम से कार्यक्रम के एवज में उनके अधीन ठेका मजदूरों से 1000 से 2000 तक चंदा वसूली करना, नहीं देने पर काम से बैठा देना,

    झारखंड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन के अध्यक्ष सागर बेसरा ने बताया कि

    पिंटु चाकिया की झूठी विभागीय गवाही ने विस्तापित / मजदूर नेता सह यूसिल कर्मचारी सागर बेसरा एवं राजू कुंकल के बर्खास्तगी में अहम भूमिका निभाया।

    उन्होंने कहा कि

    यह जांच का विषय है कि यूसिल कर्मी को किस आधार पर ठेका दिया जा रहा है यह फिर उन्हें इस्तेमाल कर बड़े अधिकारियों द्वारा ठेका के नाम से कमीशन का खेल चल रहा है?

    एक यूसिल कर्मचारी कब यूसिल का ठेकेदार बन बैठा, सोचने वाली बात है। संयुक्त यूनियन के नेताओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों से किसी प्रकार की विस्थापितों को लेकर और पूर्व कर्मियों के आश्रितों के मांग करने पर अधिकारियों के द्वारा पिंटू चकिया से मिलने की बात कही जाती है जिससे काफी निराशा होती है। पिंटू चकिया को प्रशय देने में यूसिल के अधिकारी जी एम चंचल मन्ना और गिरीश गुप्ता का नाम प्रमुख रूप से विस्थापितों के द्वारा लिया जाता है। इस मामले में भी जांच पड़ताल कर कार्रवाई करने की मांग की है।वही आरोप लगने पर यूसिल अधिकारी जी एम चंचल मन्ना का कहना है कि अगर हमारे पास किसी प्रकार की सबूत दी जाएगी तो हम निश्चित रूप से कार्रवाई करेंगे हमसे पहले के अधिकारी के द्वारा ही यहां पर ही है पिंटू चकिया को बढ़ावा दिया गया है मुझे आए यहां मात्र 6 साल हुए उसका साम्राज्य यहां पहले से ही चल रहा है।

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