राष्ट्र संवाद संवाददाता
आनन्दमार्ग प्रचारक संघ की ओर से आनन्दमार्ग स्कूल कांड्रा में द्वितीय डायोसिस स्तरीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस मौके पर उपस्थित आनंदमार्ग के भर्तृहरि ने ‘प्रगति और पंचवेदनाएं तथा साधना’ विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रगति वह है जहाँ गति है और वह गति शुभ की ओर हो। इसी प्रकार अधोगति वह है जहां गति शुभ के साथ युक्त नहीं है। कहा कि प्रगति भौतिक, बौद्धिक, कमानसाध्यात्मिक तथा विशुद्ध आध्यात्मिक आदि चार क्षेत्रों में होती है जो क्रमशः काम, अर्थ, धर्म और मोक्ष से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि भौतिक क्षेत्र में प्रगति से आशय शारीरिक सुख-सुविधाओं से है, लेकिन इस क्षेत्र में दो प्रकार की अभिव्यक्ति देखी जाती है, एक अनुकूल वेदनीयम् तथा दूसरी प्रतिकूल वेदनीयम्। पेंडुलम की गति में एक छोर सुख है तो दूसरा छोर दुख है। भौतिक क्षेत्र में परिणाम शून्य है, अर्थात न तो वृद्धि होती है और न ही वास्तविक प्रगति।
मानसिक या बौद्धिक क्षेत्र में चार अनुभूतियों की अभिव्यक्ति अनुभव की जाती है,अनुकूल वेदनीयम्, प्रतिकूल वेदनीयम्, अवेदनीयम् एवं निरपेक्ष वेदनीयम्। मानसिक या बौद्धिक स्तर में प्रगति तो होती है, किन्तु साथ-साथ नकारात्मक प्रभाव भी देखे जाते हैं। इस अवसर पर काफी संख्या में आनंदमार्ग के सदस्य और अनुयायि उपस्थित थे।

