झारखंड बजट 2026-27 पर भाजपा का हमला डॉ. जटाशंकर पांडे ने बताया निराशाजनक, आरक्षण और गरीबों के वादों पर सरकार मौन
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। झारखंड सरकार द्वारा विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट पर भाजपा बुद्धिजीवी मंच के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सह प्रदेश कार्यसमिति सदस्य डॉ. जटाशंकर पांडे ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे “आंकड़ों की बाजीगरी और जनता को भ्रमित करने वाला बजट” करार दिया है।
उन्होंने कहा कि पिछले बजट में सरकार ने 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, लेकिन सरकार यह स्पष्ट करे कि उस बजट का कितना प्रभावी क्रियान्वयन हुआ। उनके अनुसार, केवल बड़ी राशि घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि धरातल पर योजनाओं का परिणाम दिखना चाहिए।
डॉ. पांडे ने कहा कि सरकार को दोबारा सत्ता में आए एक वर्ष से अधिक समय हो गया है, लेकिन महिलाओं और युवाओं से किए गए वादे अब भी अधूरे हैं। चुनाव के दौरान शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को लेकर कई घोषणाएं की गई थीं, परंतु इस बजट में इस दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आती। उन्होंने कहा कि इससे राज्य की विकास गति को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
राज्य सरकार की नौकरियों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के वादे की याद दिलाते हुए कहा कि इस दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दलों ने चुनाव के दौरान ओबीसी समाज को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का आश्वासन दिया था, लेकिन बजट में इस विषय पर भी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब परिवार 7 किलो चावल और 2 किलो दाल मुफ्त देने की योजना के लागू होने की प्रतीक्षा करते रह गए। इसके अलावा, हर गरीब परिवार को 15 लाख रुपये तक स्वास्थ्य बीमा कवरेज देने का वादा भी अधूरा है।
डॉ जटाशंकर पांडे ने कहा कि जब सरकार अपने प्रमुख चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है, तो इस बजट को जनकल्याणकारी कैसे कहा जा सकता है। उनके अनुसार, यह बजट विकास की ठोस रूपरेखा प्रस्तुत करने के बजाय केवल आंकड़ों की चमक-दमक तक सीमित रह गया है।
उन्होंने कहा कि जनता को राहत, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें इस बजट से निराशा ही हाथ लगी है।

