जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल का भव्य समापन, पत्रकारिता–साहित्य–कला पर हुई सारगर्भित चर्चा
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर:बिष्टुपुर स्थित रमाडा होटल में आयोजित दो दिवसीय जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल का रविवार को भव्य समापन हुआ। दीप प्रज्वलन और नृत्य प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई, जिसने पूरे माहौल को साहित्य और कला के रंग में रंग दिया।
समापन दिवस पर “आज की पत्रकारिता” विषय पर आयोजित परिचर्चा में रांची से आए वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा सहित पत्रकारिता जगत के कई दिग्गजों ने अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, चुनौतियों और जिम्मेदारियों पर गंभीर विमर्श करते हुए युवा पत्रकारों को तथ्यनिष्ठ और संवेदनशील पत्रकारिता का संदेश दिया।
दोपहर बाद रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। इस दौरान पत्रकार अदिति गण सहित अन्य विशेषज्ञों ने पत्रकारिता के विद्यार्थियों से संवाद कर प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल मीडिया सहित पत्रकारिता की विभिन्न विधाओं की व्यावहारिक जानकारी दी।
क्रिस्टल हॉल में आयोजित विशेष सत्र में भोपाल से आए प्रसिद्ध चित्रकार बज्जू जी ने चित्रकला के बदलते आयामों, आधुनिक तकनीक और समकालीन कला की आवश्यकताओं पर प्रकाश डाला। उनके सत्र को कला प्रेमियों ने विशेष रुचि के साथ सुना।
इससे पूर्व जमशेदपुर साहित्य उत्सव के प्रथम दिन एक यादगार साहित्यिक क्षण भी देखने को मिला, जब लेखिका माधवी उपाध्याय ने अपनी पुस्तक “द्वार मन के सजे” प्रभात खबर के संपादक श्री संजय मिश्रा, राजेश जैस एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री दामोदर खड़से को भेंट की। यह पल साहित्यिक संवाद और सृजनात्मक साझेदारी का प्रतीक बना।
समापन समारोह में सभी कलाकारों, वक्ताओं और विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित किया गया। 20 दिसंबर से प्रारंभ हुए इस साहित्यिक महोत्सव में देशभर से विभिन्न विधाओं के विद्वानों, लेखकों, पत्रकारों और कलाकारों की भागीदारी रही, जिसने दो दिनों तक जमशेदपुर को साहित्य, पत्रकारिता, कला और विचारों का जीवंत केंद्र बना दिया।

