संविधान निर्माण पर नई बहस: एडवोकेट अनिल मिश्रा के बयान को सवर्ण महासंघ का समर्थन
जनवरी में जमशेदपुर आएंगे अनिल मिश्रा, सवर्ण महासंघ अधिवेशन में होंगे शामिल
राष्ट्र संवाद संवाददाता
ग्वालियर। आरक्षण और संविधान निर्माण को लेकर एडवोकेट अनिल मिश्रा के बयान ने नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि “आरक्षण ने हुनर नहीं, जात को पहचान दी है” और यह समानता नहीं हो सकती। साथ ही उन्होंने दावा किया कि संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर नहीं बल्कि बेनेगल नरसिम्हा राऊ थे।
सवर्ण महासंघ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डी.डी. त्रिपाठी ने ग्वालियर में मिश्रा से मुलाकात कर उनके अभियान को राष्ट्रीय समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि मिश्रा जनवरी के प्रथम सप्ताह में जमशेदपुर में आयोजित सवर्ण महासंघ अधिवेशन में शामिल होंगे।
त्रिपाठी ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के कारण हिंदुत्व और सवर्ण समाज को विभाजित करने का प्रयास हुआ है, जबकि अब सवर्ण समाज अपनी पहचान और सम्मान की लड़ाई लड़ेगा।
मिश्रा ने कहा कि संविधान निर्माण में 243 सदस्यों की भूमिका रही, लेकिन वास्तविक मसौदा बेनेगल नरसिम्हा राऊ ने तैयार किया था, जिन्हें इतिहास में उचित सम्मान नहीं मिला।
ग्वालियर आगमन पर त्रिपाठी का स्वागत राष्ट्रीय संयोजक निहाल सिंह चौहान और अन्य सवर्ण संगठनों ने किया।
कार्यक्रम में महेंद्र सिंह तोमर, छोटे सिंह भदौरिया, बाबू सिंह राठौर, यशवर्धन सिंह और ओंकार सिंह कुशवाहा सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।

