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    Home » दुर्गा वाहिनी ने नवरात्र में किया शस्त्र पूजन, मातृशक्ति और युवा बहनों ने दिखाई शौर्य परंपरा
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    दुर्गा वाहिनी ने नवरात्र में किया शस्त्र पूजन, मातृशक्ति और युवा बहनों ने दिखाई शौर्य परंपरा

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarSeptember 30, 2025No Comments4 Mins Read
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    दुर्गा वाहिनी ने नवरात्र में किया शस्त्र पूजन, मातृशक्ति और युवा बहनों ने दिखाई शौर्य परंपरा

    विश्व हिंदू परिषद की दुर्गा वाहिनी नवरात्र में करती है शस्त्र पूजन, बता रही हैं जिला उपाध्यक्ष सविता सिंह एवं जिला सह संयोजिका शोभा पाठक,मन्नू श्री, मातृ शक्ति मलिका प्रामाणिक, बौद्धिक एम साईं जी के द्वारा दिया गया,आज बिरसानगर प्रखंड श्री महादेव शिव शंकर धाम मंदिर b.ed कॉलेज रोड शांति बेली शस्त्र पूजन किया गया

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    मां दुर्गा को प्रेरणास्रोत मानकर दुर्गा वाहिनी की स्थापना 1991 में दुर्गा अष्टमी के दिन हुई थी और प्रथम संयोजिका दीदी साध्वी ऋतंभरा एवं सह संयोजिका डॉ निर्मला पुरोहित को बनाया गया था. इनके नेतृत्व में ही सेवा, सुरक्षा और संस्कार को ध्येय वाक्य मानकर महिलाओं को जागरूक करने का कार्य शुरू किया गया. विश्व हिंदू परिषद की महिला इकाई दुर्गा वाहिनी और मातृ शक्ति के द्वारा हर वर्ष शस्त्र पूजन किया जाता है. इस वर्ष भी इसका आयोजन झारखंड प्रांत के सभी जिलों और नगरों में किया जा रहा है. दुर्गा वाहिनी का ले कर झारखंड प्रांत धर्म प्रसार टोली सदस्य श्रीमती एम साईं पदमझाने कहा कि दुर्गा वाहिनी की बहनें सफेद सलवार-कुर्ता, भगवा दुपट्टा, हाथ में शस्त्र लिए शौर्य का परिचय देते हुए युवतियों की तस्वीर के साथ शस्त्र पूजा का आयोजन करेंगी. दुर्गा वाहिनी का नाम सभी जानते हैं पर दुर्गा वाहिनी के बारे में लोग नहीं जानते हैं. 1991 में दुर्गा वाहिनी की स्थापना हुई थी. सेवा, सुरक्षा और संस्कार इसका ध्येय वाक्य है. दुर्गा वाहिनी प्रांतीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण भी देती है. राष्ट्रीय प्रशिक्षण में पूरे राष्ट्र की हर प्रांत से बहनें प्रशिक्षण के लिए आती हैं और प्रांतीय वर्गों में प्रांत के जितने भी जिले हैं, सभी जिले से बहनें प्रशिक्षण में भाग लेती हैं. प्रशिक्षण में शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से बहनों को प्रशिक्षण दिया जाता है.दुर्गा वाहिनी की स्थापना 1991 में हुई थी

     

    माता दुर्गा को अपनी प्रेरणास्रोत मानकर दुर्गा वाहिनी की स्थापना 1991 में अष्टमी के दिन हुई थी और प्रथम संयोजिका (अध्यक्ष) दीदी साध्वी ऋतंभरा एवं सह संयोजिका डॉ निर्मला पुरोहित को बनाया गया था. इनके नेतृत्व में ही सेवा, सुरक्षा और संस्कार को अपना ध्येय वाक्य मानकर देशभर की महिलाओं व युवतियों को अपने समाज, धर्म व राष्ट्र के लिए समाज में व्याप्त दुराचार, भ्रष्टाचार एवं कुरीतियों के प्रति जागरूक करने का कार्य प्रारंभ किया गया. सेवा यानी समाज में नि:स्वार्थ भावना से सेवा कार्य करना कहीं ना कहीं हम समाज से नहीं जुड़ पाते हैं. इस कारण धर्मांतरण के माध्यम से वह हमसे टूटने लगते हैं, तो इस स्थिति को सुधारने का एक प्रयास करना, सुरक्षा यानी वर्तमान स्थिति के अनुसार सबसे पहले महिलाओं को अपनी अस्मिता की की सुरक्षा कैसे करनी है इस पर कार्य करना, आज कहीं ना कहीं बहनें आत्मसम्मान, आत्म सुरक्षा के गुण को नहीं अपनाने और हम किस कुल से हैं किस धर्म से हैं इस बात को नहीं समझ पाने के कारण या फिर यह कहें कि अपने महत्व को ना समझ पाने के कारण ही लव जिहाद से अपना जीवन बर्बाद कर रही हैं. इन्हीं विषयों को ध्यान में रखकर सुरक्षा के क्षेत्र में कार्य किया जाता है.झारखंड के सभी जिलों में है दुर्गा वाहिनी की समिति कि वर्तमान में झारखंड के सभी जिलों में अपनी समिति है. दुर्गा वाहिनी की बहनें अपने- अपने क्षेत्र में बहुत ही सक्रियता से कार्य कर रही हैं और वर्तमान परिप्रेक्ष्य के अनुसार समाज की हिंदू युवतियों व महिलाओं को दुर्गा वाहिनी मातृ शक्ति का कार्य करना चाहिए, ताकि हम भारत को फिर से विश्वगुरु के पद पर पद स्थापित कर सकें. जिसमें मुख्य रूप से उपस्थित धर्म प्रसार प्रांत सदस्य टोली एम साइ पद्मजा, जमशेदपुर महानगर जिला उपाध्यक्ष सविता सिंह जी, जमशेदपुर महानगर सह संयोजिका शोभा पाठक,मन्नू श्री, मातृ शक्ति मलिका की उपस्थिति रही एवं कार्यक्रम अच्छे से सफल हुआ

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