शक्तिस्वरूपा स्त्रियों की प्रेरणा से सभी लाभान्वित होते हैं – डॉ. प्रियंका मिश्रा
आईजीएनसीए में हिन्दी माह-2025 का भव्य समापन
दुर्गाष्टमी के पवित्र अवसर पर आयोजित हुआ हिन्दी माह-2025 का समापन समारोह
राष्ट्र संवाद संवाददाता
नई दिल्ली, 30 सितम्बर, मंगलवार। विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरण के साथ ही, इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के राजभाषा अनुभाग द्वारा आयोजित हिन्दी माह-2025 का भव्य समापन हुआ। प्रतियोगियों को आईजीएनसीए की निदेशक (प्रशासन) डॉ. प्रियंका मिश्रा ने पुरस्कार प्रदान किए। विभिन्न श्रेणियों में लगभग 50 लोगों को पुरस्कार दिए गए। इस अवसर पर आईजीएनसीए के विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। समापन समारोह में आईजीएनसीए के जनपद सम्पदा के विभागाध्यक्ष प्रो. के. अनिल कुमार भी उपस्थित थे। आईजीएनसीए के राजभाषा विभाग के प्रभारी प्रो. अरुण कुमार भारद्वाज ने कार्यक्रम का विद्वतापूर्ण संचालन किया और अंत में, सबके प्रति आभार भी प्रकट किया।
इस अवसर पर डॉ. प्रियंका मिश्रा ने हिन्दी माह के सफल आयोजन के लिए राजभाषा विभाग को बधाई दी। उन्होंने सबको दुर्गाष्टमी की शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह कार्यक्रम दुर्गाष्टमी के पवित्र दिन पर आयोजित किया, इसलिए सफलता असंदिग्ध है। उन्होंने कहा, मैं मानती हूं कि स्त्रियां शक्तिस्वरूपा हैं और उनकी शक्ति से सभी लाभान्वित होते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले हम हिन्दी सप्ताह मनाते थे, फिर हमने हिन्दी पखवाड़ा मनाना शुरू किया। इस वर्ष हमने हिन्दी माह का आयोजन किया यह हिन्दी के प्रति आईजीएनसीए की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे पूर्व, कार्यक्रम की शुरुआत इंद्रेश कुमार शुक्ला के स्वस्ति वाचन और अरविंद कुमार शर्मा की सरस्वती वंदना से हुई। कार्यक्रम का समापन अदिति के सुमधुर भक्ति गीत और मनीषा पॉल के गिटार पर भजन प्रस्तुति से हुआ।
गौरतलब है कि हिन्दी माह का आयोजन 2 से 30 सितम्बर तक किया गया। आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी के अनुसार, हिन्दी माह के आयोजन का उद्देश्य हिन्दी के प्रयोग को बढ़ाना और इसके प्रति जागरूकता विकसित करना था। माह भर चले इस आयोजन में विभिन्न सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों तथा प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इसमें भूले बिसरे या विलुप्त होती हिन्दी शब्दावलियां सम्बंधी प्रतियोगिता, स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता, स्वस्ति गायन, मंगलाचरण और भक्ति गीत प्रतियोगिता, दैनिक जीवन में प्रयुक्त होने वाली क्षेत्र विशेष की शब्दावलियों के लेखन की प्रतियोगिता, भाषायी/सर्वेक्षण विषयक प्रतियोगिता आदि शामिल थे।

