Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » कर्तव्य और संस्कार का अद्वितीय संगम, जब मुख्यमंत्री ने निभाया पुत्र और जनसेवक दोनों का धर्म
    Breaking News Headlines उत्तर प्रदेश ओड़िशा खबरें राज्य से चाईबासा जमशेदपुर जामताड़ा झारखंड दुमका धनबाद पटना पश्चिम बंगाल बिहार बेगूसराय मुंगेर मुजफ्फरपुर मेहमान का पन्ना रांची राजनीति राष्ट्रीय संथाल परगना संथाल परगना समस्तीपुर सरायकेला-खरसावां संवाद विशेष हजारीबाग

    कर्तव्य और संस्कार का अद्वितीय संगम, जब मुख्यमंत्री ने निभाया पुत्र और जनसेवक दोनों का धर्म

    दिशोम गुरु की विदाई, एक युग का अंत
    News DeskBy News DeskAugust 17, 2025No Comments3 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    कर्तव्य और संस्कार का अद्वितीय संगम, जब मुख्यमंत्री ने निभाया पुत्र और जनसेवक दोनों का धर्म

    दिशोम गुरु की विदाई, एक युग का अंत

    अमन शांडिल्य

    झारखंड के संघर्ष इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय अब स्मृतियों में बदल गया। दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जाना केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे आंदोलन की क्षति है। जिनकी आवाज़ ने कभी जंगल-पहाड़ों से उठकर संसद के गलियारों तक दस्तक दी, जिनके नेतृत्व ने झारखंड को अस्तित्व दिलाया, वे आज भले ही देह रूप में हमारे बीच न हों, लेकिन उनके विचार और संघर्ष जीवित हैं।

     

     

    *पिता से मिले जीवन के पाठ*

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए शिबू सोरेन केवल पिता नहीं थे, बल्कि जीवन के पहले शिक्षक थे। उन्होंने बचपन से देखा कि कैसे गुरुजी हर अन्याय के खिलाफ खड़े होते हैं, चाहे इसके लिए जेल ही क्यों न जाना पड़े। एक बचपन की घटना आज भी यादगार है — जब लंबे समय बाद पिता घर लौटे, तो नन्हें हेमंत ने कहा, “पिताजी, इतनी देर क्यों की?” और गुरुजी ने जवाब दिया, “पुत्र, यह देर तुम्हारे आने वाले कल के लिए थी।” यही संस्कार आज हेमंत के शासन और निर्णयों में झलकते हैं।

    संस्कार की मिसाल: सर मुंडन की परंपरा

    दशकर्म के अवसर पर मुख्यमंत्री ने राजकीय प्रोटोकॉल और व्यक्तिगत पद की गरिमा से ऊपर उठकर पुत्र का धर्म निभाया। उन्होंने परंपरा के अनुसार सर मुंडन कराया, जो सादगी, श्रद्धा और संस्कार का प्रतीक था। उस पल वे न मुख्यमंत्री थे, न राजनीतिक नेता — वे सिर्फ एक पुत्र थे, जो अपने पिता की आत्मा की शांति के लिए पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को निभा रहे थे। इस दृश्य ने याद दिलाया कि पद चाहे कितना भी ऊँचा हो, संस्कार सदैव सर्वोपरि होते हैं।

    *अंतिम संस्कार के 10 मार्मिक क्षण*

    1. मुखाग्नि से पहले पिता के पार्थिव शरीर के पास मौन खड़े रहना।

    2. पहली लकड़ी रखते समय हाथों का अनायास कांपना।

    3. आंसुओं को रोकने का असफल प्रयास।

    4. मां और भाइयों को ढांढस बंधाना।

    5. दूर-दराज से आए ग्रामीणों का हाथ थामकर आभार व्यक्त करना।


    6. अधिकारियों से धीमे स्वर में राज्य के जरूरी मामलों पर बात करना।

    7. चिता की लपटों के बीच अंतिम दृष्टि में ठहराव।

    8. गंगा जल अर्पित करते समय मौन प्रार्थना — “आपके सपनों को अधूरा नहीं छोड़ूंगा।”

    9. ग्रामीणों के बीच बैठकर संवेदनाएं स्वीकार करना।

    10. अगले ही दिन शासन कार्यों में लौटकर निर्णय लेना।

    *कर्तव्य का आदर्श*

    महाभारत में श्रीकृष्ण ने सिखाया था — “राजा का धर्म है कि वह प्रजा की सेवा में कभी विचलित न हो।” मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसी आदर्श को जीवन्त किया। निजी शोक के बीच उन्होंने न केवल परिवार का सहारा बना, बल्कि प्रशासन की गति भी थमी नहीं।

     

    *जनता के लिए सीख*

    इस घटना ने यह स्पष्ट किया कि एक सच्चे नेता की पहचान भाषणों में नहीं, बल्कि कठिनतम समय में निभाए गए कर्मों में होती है। हेमंत सोरेन का आचरण यह संदेश देता है कि राजधर्म और पुत्र धर्म, दोनों को साथ लेकर चलना ही एक सच्चे जननेता की असली पहचान है।

    *दिशोम गुरु की विरासत*

    झारखंड आंदोलन के अगुवा

    तीन बार मुख्यमंत्री

    आदिवासी भूमि और अधिकारों के प्रबल रक्षक

    केंद्रीय कोयला मंत्री के रूप में योगदान

    गांव-गांव पैदल जाकर जनता की समस्याओं से जुड़ना

    *हेमंत सोरेन की प्राथमिकताएं*

    आदिवासी कल्याण और शिक्षा सुधार

    रोजगार सृजन और कौशल विकास

    स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर निवेश

    पारदर्शी और जवाबदेह शासन

    कर्तव्य और संस्कार का अद्वितीय संगम जब मुख्यमंत्री ने निभाया पुत्र और जनसेवक दोनों का धर्म
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleराष्ट्र संवाद हेडलाइंस
    Next Article पीएम मोदी के लाल क़िले से आरएसएस की तारीफ़ के  निहितार्थ

    Related Posts

    निक्को पार्क के पास कार सवार पांच युवक धारदार हथियार के साथ हिरासत में, पुलिस कर रही पूछताछ

    August 8, 2026

    जमशेदपुर में दर्दनाक सड़क हादसा: स्कूल बस ने 7 वर्षीय बच्ची को कुचला, मौत; दो घायल, सड़क जाम

    August 8, 2026

    डुमरी विधायक जयराम महतो ने पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता एवं मानगो मेयर सुधा गुप्ता से की शिष्टाचार मुलाकात

    August 8, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    निक्को पार्क के पास कार सवार पांच युवक धारदार हथियार के साथ हिरासत में, पुलिस कर रही पूछताछ

    जमशेदपुर में दर्दनाक सड़क हादसा: स्कूल बस ने 7 वर्षीय बच्ची को कुचला, मौत; दो घायल, सड़क जाम

    डुमरी विधायक जयराम महतो ने पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता एवं मानगो मेयर सुधा गुप्ता से की शिष्टाचार मुलाकात

    जियाडा के नए नियमों को लेकर उद्योग संगठनों के साथ बैठक, सुझावों पर हुआ मंथन

    कॉलेज परिसर में करंट लगने से छात्र घायल, 5 लाख मुआवजे की मांग की

    प्रधानाध्यापक पर छात्र का सिर फोड़ने का आरोप, तीन टांके लगने के बाद रुका खून

    युवा शक्ति बनेगी झारखंड की ताकत, युवाओं को नेतृत्व देगा आजसू : सुदेश महतो

    भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी पर छात्रों के समर्थन में उतरे सुदेश महतो, निष्पक्ष जांच की मांग

    निर्मल दा के सपनों का झारखंड बनाना है : हेमंत सोरेन

    शहीद निर्मल महतो की समाधि पर पहुंचे सीएम हेमंत सोरेन, बोले ‘निर्मल दा के सपनों का झारखंड बनाना है’

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.