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    जिया हहरवल ये ‘ हरि जी ‘ अपने परलोकवा गईल ए राम….

    News DeskBy News DeskAugust 3, 2025No Comments5 Mins Read
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    जिया हहरवल ये ‘ हरि जी ‘ अपने परलोकवा गईल ए राम….

     

    अपनी टीम के साथियों पर गजब का भरोसा रखते थे हमारे अपने हरि जी

    :::स्मृति शेष :::

    अरुण सिंह

    पहले दक्षिण बिहार और अलग प्रदेश बनने के बाद में झारखंड की पत्रकारिता में एक अलग हनक रही है हरि नारायण सिंह की l चाहे जिस किसी अख़बार को जितने दिनों तक संभालने का मौका मिला, उन्होंने लिक से हटकर कुछ नया कर दिखलाया और पाठकों के बीच खूब शोहरत भी कमाया l

     

    अपनी टीम के सदस्यों की क्षमता को कैसे और किस कदर उभारा – निखारा जा सकता है, भलिभांति जानते थे हरि जी l
    अपने साथियों के अंदर की क्षमता को कैसे और किस कदर निखारना है, ये हरि जी से बेहतर शायद ही कोई दूसरा संपादक जानता हो ? कई अवसर ऐसे आये ज़ब उन्होंने इसे बखूबी साबित भी किया l
    हरि का मूलमंत्र था अपनी टीम के लिए ‘यू कैन ‘

     

    मुझे वर्ष 2002 से उनके साथ दैनिक ‘ हिंदुस्तान ‘ में काम करने का अवसर हासिल हुआ l तब पूर्वी सिंह भूम जिला के डुमरिया प्रखंड के लांगो गाँव में 7 – 8 अगस्त 2003 को नौ नक्सलियों की सामूहिक हत्या ( सेंदरा ) की बड़ी घटना हुई थी l वर्ष 2007 में 4 मार्च को होली के दिन जमशेदपुर के तत्कालीन सांसद सुनील महतो की हत्या नक्सलियों ने गोली मारकर कर दी थी l ऐसी और भी कुछ बड़ी घटनाएं उस दौर में घाटशिला के आसपास इलाके में हुई थी, जो कई – कई दिनों तक अख़बार की सुर्खियां बनी रही l मॉडम सेंटर का प्रभारी होने के चलते हर बार मेरे हाथ – पांव कांपे थे लेकिन हरि जी का फ़ोन आते ही एक नई स्फूर्ति मिलती थी और कंप्यूटर के की- बोर्ड पर उंगलियां चलने लगती थी, हरि जी एवं उस समय मेरे सीनियर रहे श्रीश चाँद जी, विजय भास्कर जी, दीपक अम्बष्ठ जी, मनोज तिवारी सर के पसंद का शानदार लेख तैयार हो जाता था l

     


    मेरी क्षमता पर हरि नारायण जी को इतना भरोसा था कि मुझे प्रोत्साहित करके, मुझमे जोश भरके
    ‘ हिंदुस्तान ‘ में मेरे से लिखवा लिए सांसद सुनील महतो हत्याकांड की आँखों देखी l

    ऑल एडिशन ‘ हिंदुस्तान ‘ में जैकेट प्रकाशित हुआ था –
    ‘ पहले माला पहनाई, फिर गोली मारी l ‘ लेख मेरा, हैडलाइन हरि नारायण सर का l

    आज़ाद सिपाही में आने का आदेश अभी सालभर पहले ही उन्होंने दिया मुझे l एक दिन अचानक फोन आया – क्या कर रहे हो? रांची नहीं आते क्या कभी? मैंने कहा – आता हूँ सर l 19 जुलाई को आना है रांची मुझे l सर ने आदेशात्मक लहजे में कहा – आकर मिलो l रांची दफ्तर पहुंचकर मैं पहके अजय शर्मा से मिला l उन्होंने सर के चैम्बर तक पहुंच दिया l घर – परिवार के बारे में पूछे l मुझसे बिना पूछे ही उन्हीने राहुल जी को बुलाकर कहा – ये अरुण है l मेरे साथ काफ़ी दिनों तक काम किया है l इसका आधार कार्ड और फोटो ले लो, आई – कार्ड बना देना l और हाँ, इसे ब्यूरो चीफ बनाना l मैं एक बारगी उनकी ओर देखा और नज़र नीचे कर लिया l

     


    बस, यहीं से शुरू हुआ सालभर पहले मेरी दूसरी पारी अपने तरह के एकलौते अख़बारनविस हरि सर के सानिध्य में l

    फिर आया विधानसभा चुनाव l
    और फिर उन्होंने खरोच – खरोच कर मुझसे पीलिटिकल स्टोरी निकलवाया l जबरदस्त प्लेसमेंट दिया मेरी राजनितिक कथानक को l
    कॉम किशन जी एवं नक्सलवाद कवर करने लगातार दो दफा लालगंज जाने का फरमान सुना दिए l दोनों बार टीम के साथ भेजा उन्होंने l लेकिन विशेष ताकीद दिए कि तुम अपनी खबर डायरेक्ट रांची भेजोगे l जमशेदपुर संस्करण के हमारे तत्कालीन संपादक विजय भास्कर जी को ज़ब मैंने बताया तो उन्होंने कहा – जैसा हरि भाई कहते हैँ, वैसा करो l

     

    आज दोपहर को 12. 34 बजे ग्रुप में हम सबों को छोड़कर हरि जी के चले जाने की सुचना मिली l मन बेचैन हो उठा l मैसेज पढ़ते ही मुँह से निकला – अरे ! पत्नी ने चौक कर मेरी ओर देखकर पूछी – क्या हुआ ? मैंने बताया तो कुछ क्षण के लिए वह गंभीर मुद्रा में मुझे निहारने के बाद दूसरे कमरे में जाकर मेरी बेटी निधि और बेटा अंकित उर्फ़ गोलू को फ़ोन पर यह दुखद खबर देते हुए उन दोनों से कहा कि तुम्हारे पापा काफ़ी चिंतित हो उठे हैँ l फिर बच्चों ने मुझे बात करके हिम्मत दिलाया l मेरे परिवार का कोई सदस्य हरि नारायण सर से कभी नहीं मिल पाया था, लेकिन मेरी बेटी को एम. एससी ( क्रिमिनलॉजी ) में गोल्ड मैडल मिला l पी. एचडी के दर्मयान उसके आर्टिकल विभिन्न देसी – विदेशी प्रकाशन में ज़ब कभी छपे, हरि सर मेरी बेटी की खुले कंठ से सराहना किया करते थे l सिर्फ साथ में काम नहीं करते रहे, बल्कि होने तमाम सहयोगियों से पारिवारिक रिश्ता बना लेने की कला थी हमारे हरि जी के अंदर l

     

    भारी मन से अब मैं ये सब लिखने की कोशिश में लगा था, इसी क्रम में झारखंड के पहले स्वास्थ्य मंत्री रहे डॉ दिनेश कुमार सारंगी जी का फ़ोन आया l उन्होंने हरि नारायण जी के साथ अपने संबंध / संपर्क के बारे में कई बातें बताया और याद किया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के दफ्तर में हरि जी से उनकी पहली मुलाक़ात हुई थी और फिर एक गहरा नाता बन गया था दोनों के बीच, जो आखिरी वक्त तक बरकरार रहा, कभी फ़ोन पर तो कभी आमने – सामने बैठकी और बतकही के सहारे l डॉ साहब ने कहा – एक बेहतरीन मित्र हमसे दूर चले गया l ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में जगह दें l

     

    राष्ट्र सवाद की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि

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