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    खेती से प्रेरणा: जामताड़ा के टीएमसी जिलाध्यक्ष मुस्ताक सेख की मिसाल

    Nizam KhanBy Nizam KhanJuly 28, 2025No Comments3 Mins Read
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    खेती से प्रेरणा: जामताड़ा के टीएमसी जिलाध्यक्ष मुस्ताक सेख की मिसाल

    निजाम खान। राष्ट्र संवाद

    झारखंड के जामताड़ा जिले में राजनीति को एक नई दिशा देने वाले टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) के जिलाध्यक्ष मुस्ताक सेख इन दिनों क्षेत्र में एक अलग पहचान बना रहे हैं। आमतौर पर नेता समाज सेवा और राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित रहते हैं, लेकिन मुस्ताक सेख ने एक अलग रास्ता चुना है — वह खुद खेतों में उतरकर खेतीबाड़ी कर रहे हैं और अपने कार्यकर्ताओं सहित आम लोगों को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रहे हैं।

    मुस्ताक सेख का मानना है कि किसान देश की रीढ़ होते हैं और जब तक गांवों का विकास नहीं होगा, तब तक समाज में स्थायी बदलाव संभव नहीं है। उन्होंने अपने खेत में आधुनिक तकनीकों और जैविक तरीकों से खेती की शुरुआत की है, जिसमें सब्जी, धान, मौसमी फल और दलहन की फसलें शामिल हैं। उनकी इस पहल को देख आसपास के गांवों के युवा और किसान भी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

    सबसे खास बात यह है कि मुस्ताक सेख किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि दिल से खेती कर रहे हैं। सुबह-शाम खेतों में काम करना, पौधों की देखभाल करना और मजदूरों के साथ मिलकर खेत तैयार करना उनकी दिनचर्या में शामिल हो चुका है। उनकी यह सादगी और समर्पण समाज में एक सकारात्मक संदेश दे रहा है — कि राजनीति सेवा का माध्यम है, और सेवा का सबसे बड़ा रूप है आत्मनिर्भरता की प्रेरणा देना।

    मुस्ताक सेख ने यह भी साबित किया है कि खेती केवल मजदूर वर्ग का काम नहीं, बल्कि शिक्षित और समझदार लोग भी इस क्षेत्र में नई सोच और तकनीक के साथ बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने ड्रिप इरिगेशन, जैविक खाद और मिश्रित खेती जैसे तरीकों को अपनाकर स्थानीय किसानों को भी इससे जोड़ना शुरू किया है। उनके खेत अब “प्रेरणा के खेत” के रूप में पहचाने जा रहे हैं।

    स्थानीय युवाओं के लिए वे एक मार्गदर्शक बन चुके हैं। बेरोजगारी के दौर में जब युवा शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, मुस्ताक सेख की सोच ने उन्हें यह सिखाया है कि गांव में रहकर भी सम्मानजनक और लाभकारी जीवन जिया जा सकता है।

    उनकी यह पहल बताती है कि यदि राजनीतिक नेतृत्व व्यवहारिक हो, जमीन से जुड़ा हो, तो समाज में बदलाव की गति और तेज हो सकती है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि नेता होने का अर्थ केवल भाषण देना या रैलियां करना नहीं, बल्कि खुद उदाहरण पेश करना भी है।

    अंततः, मुस्ताक सेख की यह कोशिश केवल खेती नहीं, बल्कि सामाजिक नवचेतना का प्रतीक है। यह कहानी बताती है कि जब नेतृत्व प्रेरणादायी हो, तो समाज अपने आप जागरूक और आत्मनिर्भर बनता है। उनकी यह पहल आने वाले समय में झारखंड के युवाओं के लिए एक नई राह बनाएगी।

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