पवित्र श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर झारखंड के आदर्श विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने देशवासियों को दिए शुभकामनाएं
निजाम खान। राष्ट्र संवाद
झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने पवित्र श्रावण मास के प्रथम सोमवार के शुभ अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि श्रावण का यह पावन महीना भगवान शिव की भक्ति, समर्पण और आस्था का प्रतीक है। खासकर सोमवार का दिन शिवभक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, जब वे व्रत, जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के माध्यम से भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।
रवींद्रनाथ महतो ने कहा कि श्रावण मास केवल धार्मिक अनुष्ठान का समय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत करने का एक माध्यम है। इस दौरान कांवड़ यात्रा, सामूहिक पूजा और मंदिरों में होने वाले धार्मिक आयोजन लोगों को जोड़ने का कार्य करते हैं। ऐसे समय में श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ शिवालयों में जुटते हैं और ‘बोल बम’ के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठता है।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि इस श्रावण मास को सकारात्मक सोच, सेवा कार्यों और समाज में सौहार्द फैलाने के लिए एक अवसर के रूप में लें। उन्होंने कहा कि “भगवान शिव के जीवन से हमें संयम, धैर्य, विनम्रता और सहनशीलता की प्रेरणा मिलती है। अगर हम शिव के इन गुणों को अपने जीवन में उतारें, तो न केवल हमारा व्यक्तिगत जीवन बेहतर बनेगा, बल्कि समाज में भी शांति और समरसता की स्थापना होगी।”
विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि झारखंड की विविध सांस्कृतिक पहचान में श्रावण मास की अपनी विशेष भूमिका रही है। देवघर का बाबा बैद्यनाथ धाम इस महीने लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनता है। यहां देशभर से कांवड़िए जल चढ़ाने आते हैं और यह आयोजन पूरे राज्य के लिए एक गौरव का क्षण होता है। महतो ने प्रशासन और श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि इस धार्मिक यात्रा को शांतिपूर्ण, स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने में सभी सहयोग करें।
अपने संदेश के अंत में रवींद्रनाथ महतो ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि श्रावण मास का यह पहला सोमवार सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति लेकर आए। उन्होंने कामना की कि प्रदेश में धार्मिक सहिष्णुता, सामाजिक समरसता और विकास की गति और तेज हो।
इस प्रकार, रवींद्रनाथ महतो का यह शुभकामना संदेश न केवल एक धार्मिक अवसर पर दी गई बधाई है, बल्कि यह झारखंड की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का भी प्रयास है। श्रावण सोमवार जैसे पर्व हमें याद दिलाते हैं कि श्रद्धा और सेवा के मार्ग पर चलकर हम एक बेहतर समाज और समर्पित जीवन की ओर अग्रसर हो सकते हैं।

