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    Home » आनंदमार्गीय त्रिदिवसीय सेमिनार के दूसरे दिन का आयोजन
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    आनंदमार्गीय त्रिदिवसीय सेमिनार के दूसरे दिन का आयोजन

    Nizam KhanBy Nizam KhanJuly 5, 2025No Comments2 Mins Read
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    “प्राण धर्म: मानव अस्तित्व की अनिवार्यता आनंद मार्ग का वैश्विक सन्देश”

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    देवघर : त्रिदिवसीय सेमिनार एवं योग साधना शिविर के दूसरे दिन का शुभारम्भ प्रातःनगर कीर्तन के बाद पांचजन्य से हुआ।उसके बाद आसन एवं प्राणायाम किया गया।इसके बाद सेमिनार में उपस्थित साधकों को संबोधित करते हुए आचार्य रागानूँगानंद अवधूत ने “प्राण धर्म” विषय पर एक विचारोत्तेजक वक्तव्य जारी किया है, जिसमें मानव जीवन के सार, उसकी गरिमा और उसके सार्वभौमिक उद्देश्य पर गहन प्रकाश डाला गया है। इस वक्तव्य में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी व्यक्ति, समाज या राष्ट्र की आत्मा उसके “प्राण धर्म” में निहित होती है — वह आंतरिक अनुशासन, जीवन-दृष्टिकोण और मूल्य जो मानव को पशुत्व से उठाकर दिव्यता की ओर ले जाते हैं।आनंद मार्ग के अनुसार, भारत की सभ्यता सदियों से एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण पर आधारित रही है, जहाँ जीवन का प्रत्येक पहलू साधना का ही अंग माना गया। भारत का प्राचीन शिक्षातंत्र, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्य उसी आध्यात्मिक जीवनदृष्टि से पोषित हुए जिसे “प्राण धर्म” कहा जा सकता है।इस वक्तव्य में यह भी बताया गया कि किस प्रकार विदेशी शासन चाहे वह मुग़ल हो, ब्रिटिश हो या पूंजीवादी शक्तियाँ भारत के प्राण धर्म को कमजोर करने का प्रयास करते रहे। ब्रिटिशों ने शिक्षा के माध्यम से एक ऐसा वर्ग खड़ा किया जो भारतीय होकर भी भारतीय न रहा। साम्यवाद ने भी, भौतिकवाद के नाम पर, मानव जीवन के आध्यात्मिक मूल्यों को नष्ट करने की कोशिश की। किंतु आनंद मार्ग इस विघटनकारी प्रक्रिया के विरुद्ध खड़ा है।आनंद मार्ग का सामाजिक-आर्थिक दर्शन, उसकी शिक्षा-नीति और आध्यात्मिक साधना प्रणाली, सभी इस बात के लिए समर्पित हैं कि प्रत्येक मानव अपने प्राण धर्म का पुनः अन्वेषण कर सके और उसे पूर्ण रूप से जी सके। आनंद मार्ग जीवन को माया नहीं मानता, बल्कि उसे एक सापेक्ष सत्य मानकर, उसकी समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय भागीदारी करता है।आज,जब दुनिया भौतिकता और मानसिक तनाव से ग्रसित है,आनंद मार्ग का यह संदेश समय की माँग बन गया है।

    “मानव को उसकी आत्मचेतना से जोड़कर, उसकी आध्यात्मिक भूख को तृप्त करना ही सच्ची शिक्षा और सच्चा धर्म है।”आनंद मार्ग विश्व के सभी देशों को उनके विशिष्ट राष्ट्रीय प्राण धर्म को सुरक्षित रखते हुए, एक सार्वभौमिक मानव धर्म की स्थापना के लिए आमंत्रित करता है।कार्यक्रम की सफलता के लिए भुक्ति प्रधान एवं भुक्ति कमिटी पुरी तरह से सक्रिय है।

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