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    Home » निर्मल महतो का नाम सिर्फ निर्मल दा ही नहीं, झारखंड अलग राज्य का आंदोलन भी है : सहिस
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    निर्मल महतो का नाम सिर्फ निर्मल दा ही नहीं, झारखंड अलग राज्य का आंदोलन भी है : सहिस

    Nizam KhanBy Nizam KhanAugust 8, 2024No Comments4 Mins Read
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    निर्मल महतो का नाम सिर्फ निर्मल दा ही नहीं, झारखंड अलग राज्य का आंदोलन भी है : सहिस
    राष्ट्र संवाद संवाददाता
    शहीद निर्मल दा के शहदत पर आजसू जिला कमिटी पूर्वी सिंहभूम के अध्यक्ष कन्हैया सिंह के नेतृत्व मे जमशेदपुर स्थित मोदी पार्क से जुलुस की शक्ल मे चमरिया गेस्ट हॉउस पंहुचा और उनके शहीद वेदी पर माल्यार्पण कर उलियाण स्थित समाधि स्थल पर भी पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रधांजलि दिए इसके बाड़ सभी कार्यकर्ता बोड़ाम पार्टी कार्यालय पहुचे वहां से हजारों मोटरसाईकिल से जुलुस की शक्ल मे मुकुरडीह चौक स्थित वीर शहीद निर्मल महतो के प्रतिमा पर पदयात्रा पर माल्यार्पण कर एक श्रधांजलि सभा का आयोजन किया गया को जिसमे मनभूम बिख्यात झुमर शिल्पी गोबिंदो लाल महतो,भोलानाथ महतो, एवम राजदूत महतो द्वारा झारखंडी संस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, उक्त श्रद्धांजलि सभा को सम्बोधित करते हुए कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि राज्य के पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिस ने कहा की निर्मल महतो का नाम सिर्फ निर्मल दा ही नहीं, झारखंड अलग राज्य का आंदोलन भी है. झारखंडी जनमानस की पहचान, जल, जंगल, जमीन के अस्तित्व की सुरक्षा व झारखंडी मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करना निर्मल महतो की पहचान थी. झारखंड अलग राज्य के आंदोलन को दिशा देने में अपना सर्वस्व कुर्बान करने वालों में निर्मल महतो स्वयं एक आंदोलन थे एक विचार थे. उनकी कुर्बानियों का फल झारखंड अलग राज्य है.
    जहां शोषण की बात सुनते निर्मल दा पहुंच जाते, कई बार तो सूदखोरों की जमकर पिटाई भी किये. हॉकी स्टिक उनके ग्रुप का हथियार हुआ करता था यहीं से उनकी लोकप्रियता बढ़ती गयी. निर्मल महतो जानते थे कि झारखंडी लोगों का विकास तब तक नहीं हो सकता, जब तक वह शराब नहीं छोड़ेंगे. वे मानते थे कि झारखंडियों का विकास इसलिए नहीं हो पाता क्योंकि वह शराब में पैसा बर्बाद कर देते हैं और वर्तमान सरकार आज शराब को व्यपार बना लिया है उनके नाम पर राजनितिक रोटी सेक रही हैँ जल जंगल जमीन की बात करने वाले लोग आज जल जंगल जमीन का ही सौदा करने लगे हैँ राज्य को लूटने वालो का सहयोगी बन लूट मे हिस्सेदार बने हुए हैँ ऐसी सरकार को उखाड़ने और पुनः निर्मल दा के सपनो का झारखण्ड बनाने का संकल्प लेकर आज हमलोग उलगुलान करते है।
    अवसर पर जिला अध्यक्ष कन्हैया सिँह ने कहा की शहीद निर्मल दा हमारे बिच नहीं है. लेकिन उनके विचार, उनकी कर्मठता और राज्य के प्रति उनकी संवेदनाएं और संदेश आज भी जिंदा है. बचपन में हमने उनको बहुत करीब से देखा. उनसे काफी प्रभावित रहे हैं. आज भी उनकी सोच और आदर्शों को लेकर वह हमारे लिए जीवंत है और जीवंत रहेंगे. हम उनकी सोच और प्रेरणा को आगे बढ़ाएंगे लेकिन राज्य अलग होने के बाद पहली बार गांव के लोग वर्तमान सरकार से उम्मीद लगाए थे की उनके सपनो को वर्तमान सरकार साकार करेंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ, वर्तमान सरकार की उनके प्रति मन मे जरा भी चेतना नहीं है उनके सोच के प्रति सरकार कभी गंभीर नहीं हुआ बल्कि उनके जयंती और पुण्य तिथि पर राज्य की जनता को दीगभर्मित करती हैँ और वोट की राजनीती समझ उनका इस्तेमाल करती हैँ इसलिए पूर्व मंत्री सहिस जी संकल्प को दोहराइये और आजसू की सरकार बनाइये और यह बट निर्मल दा भी जानते थे की झामुमो से राज्य का भला नहीं हो सकता हैँ इसलिए आजसू पार्टी का निर्माण किये थे।

    कार्यक्रम मे मुख्य रूप से आजसू जिला अध्यक्ष कन्हैया सिँह के साथ सत्यनरायण महतो, सचिन महतो, वन विहारी महतो, संजय सिंह, श्याम कृष्ण महतो , अप्पू तिवारी, आदित्य महतो, संजय सिंह, मृत्युजय सिंह, छोटूलाल सिंह सरदार, विमल मौर्या, ललन झा,विश्वदेव महतो, सोनू सिंह, गणेश महतो, तरनी महतो, उमाशंकर सिंह,सुनील मुर्मू, बहादुर गोप, तन्वीर आलम उर्फ़ राजू, नीलकमल महतो, सचिन प्रसाद,अरुण महतो, संजय करुआ, मेनका किशकू, प्रवीण प्रसाद, देवयानी दास, रेणुका महतो, पारुल दे,चन्द्रश्वर पांडेय, संगीता कुमारी, रंजना राय, रामकृष्ण महतो, अजित महतो, मनोहर महतो, आंदो स्वर्णकार, संतोष सिंह, सुधीर सिंह,अनाथ बंधु कुम्भकार, श्रीमंत मिश्रा, समता महतो, सुधीर शर्मा,निरंजन महतो, शेखर सहिस, समेत हजारों लोग मौजूद रहे।

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