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    छत्तीसगढ़ में 21 दिन चले नक्सल विरोधी अभियान में 31 नक्सली मारे गए, 18 जवान भी घायल

    News DeskBy News DeskMay 14, 2025Updated:May 14, 2025No Comments5 Mins Read
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    छत्तीसगढ़ में 21 दिन चले नक्सल विरोधी अभियान में 31 नक्सली मारे गए, 18 जवान भी घायल

     

     

    बीजापुर, 14 मई (भाषा) छत्तीसगढ़ के बीजापुर और पड़ोसी राज्य तेलंगाना की सीमा पर स्थित करेगुट्टालू की पहाड़ी में 21 दिन चले अब तक के सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों ने 31 नक्सलियों को मार गिराया तथा बड़ी संख्या में हथियार और विस्फोटक बरामद किया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

    अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के दौरान बारूदी सुरंग विस्फोट की घटनाओं में सुरक्षाबलों के 18 जवान घायल हुए हैं।

    धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र करेगुट्टालू पहाड़ी पर चले अभियान की सफलता के बाद आज बीजापुर जिला मुख्यालय में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक जीपी सिंह और छत्तीसगढ़ पुलिस के महानिदेशक अरूण देव गौतम ने अभियान के संबंध में जानकारी दी।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि माओवादियों के सबसे मजबूत सशस्त्र संगठन पीएलजीए बटालियन, सीआरसी कंपनी और तेलंगाना स्टेट कमेटी सहित अनेक शीर्ष माओवादियों की शरणस्थली सुकमा और बीजापुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में थी। उनके मुताबिक, इन क्षेत्रों में सुरक्षाबलों द्वारा अनेक नए सुरक्षा शिविरों की स्थापना की गई है तथा इन क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियान संचालित किए जा रहे हैं।

    अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षाबलों का वर्चस्व बढ़ने के कारण नक्सलियों ने यूनिफाईड कमांड का गठन किया और उन्होंने वहां से पलायन कर छत्तीसगढ़ के बीजापुर और तेलंगाना के मुलुगू जिले की सीमा पर अभेद्य समझे जाने वाले करेगुट्टालू पहाड़ी पर शरण ली थी।

    उन्होंने बताया कि करेगुट्टालू पहाड़ी लगभग 60 किलोमीटर लंबा और पांच किलोमीटर से लेकर 20 किलोमीटर तक चौड़ा अत्यन्त दुष्कर पहाड़ी क्षेत्र है। इस पहाड़ी की भौगोलिक स्थिति काफी कठिन और चुनौतीपूर्ण है।

    अधिकारियों ने बताया कि नक्सलियों ने पिछले ढाई वर्ष में धीरे-धीरे उस पहाड़ी पर अपना बेस तैयार कर लिया था तथा यह पहाड़ी लगभग 300-350 हथियारबंद नक्सली समेत पीएलजीए बटालियन की टेक्निकल डिपार्टमेन्ट (टीडी) यूनिट और अन्य महत्वपूर्ण संगठनों की शरणस्थली थी।

    उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों को मिली सूचनाओं के आधार पर छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने इस वर्ष 21 अप्रैल को एक बड़ा संयुक्त अभियान शुरू किया था, जो अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक नक्सल विरोधी अभियान है। इस अभियान में राज्य और केंद्र की विभिन्न एजेंसियों ने मिलकर काम किया है।

    अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य माओवादियों की सशस्त्र क्षमता को क्षीर्ण करना, हथियारबंद दस्तों को समाप्त करना, इस दुर्गम इलाके से नक्सलियों को हटाना और नक्सलियों के दुर्दांत संगठन पीएलजीए बटालियन को क्षिन्न-भिन्न करना था।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस नक्सल विरोधी अभियान में 21 अप्रैल से 11 मई के दौरान कुल 21 मुठभेड़ों में 16 महिला नक्सली समेत कुल 31 नक्सलियों के शव और 35 हथियार बरामद किए गए हैं।

    उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच के मुताबिक मुठभेड़ स्थल से बरामद शव पीएलजीए बटालियन नंबर एक, तेलंगाना राज्य समिति और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के नक्सलियों के हैं।

    अधिकारियों ने बताया कि मारे गए नक्सलियों में से 28 नक्सलियों की पहचान कर ली गई है और इनके सिर पर कुल एक करोड़ 72 लाख रुपये का इनाम है।

    वहीं, जानकारी मिली है कि इस अभियान के दौरान कई नक्सली नेता मारे गए हैं तथा कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

    उन्होंने बताया कि अब तक इस अभियान के दौरान कुल 31 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं, जिनमें से तीन शव 24 अप्रैल को, एक शव पांच मई को, 22 शव सात मई को तथा पांच शव आठ मई को बरामद किए गए।

    अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान में अब तक कुल 216 माओवादी ठिकाने और बंकर नष्ट किए गए है। माओवादी ठिकाने और बंकर की तलाशी के दौरान कुल 450 बारूदी सुरंग, 818 बीजीएल शेल, 899 बंडल कार्डेक्स, डेटोनेटर और भारी मात्रा में विस्फोटक सामान बरामद किया गया है।

    उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के चार तकनीकी इकाइयों को नष्ट किया है, जिनका उपयोग बीजीएल शेल, देशी हथियार, बारूदी सुरंग और अन्य घातक हथियारों के निर्माण के लिए किया जा रहा था।

    उनके मुताबिक, इन तकनीकी इकाइयों के ठिकानों से चार लेथ मशीन भी बरामद कर नष्ट की गई। अभियान के दौरान विभिन्न माओवादी ठिकानों और बंकरों से 12 हजार किलोग्राम राशन सामग्री, दवाएं और दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी बरामद की गई हैं।

    अधिकारियों ने बताया कि 21 दिनों के इस अभियान के दौरान बारूदी सुरंग में विस्फोट की घटनाओं में सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन, एसटीएफ और जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के कुल 18 जवान घायल हुए हैं।

    उनके मुताबिक, सभी घायल जवान अब खतरे से बाहर हैं तथा उन्हें विभिन्न अस्पतालों में उपचार प्रदान किया जा रहा है।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि करेगुट्टालू पहाड़ी के ऊपर की परिस्थितियां काफी विपरीत है। यहां दिन के समय तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने से अनेक जवान डिहाईड्रेशन के शिकार हुए लेकिन उसके बाद भी उन्होंने ऊंचे मनोबल के साथ नक्सलियों के खिलाफ अभियान जारी रखा।

    अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2024 में नक्सल विरोधी अभियान में प्राप्त बढ़त को आगे बरकरार रखते हुए वर्ष 2025 में भी राज्य में सुरक्षाबलों ने आक्रामक नक्सल विरोधी अभियानों को जारी रखा है। इस अभियान के तहत पिछले चार माह में राज्य में 174 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं।

    उन्होंने बताया कि नक्सलियों के विरूद्ध इस व्यापक अभियान के कारण नक्सलियों की बड़ी इकाईयां अब छोटे-छोटे इकाईयों में बंट गई है। सुरक्षाबलों की करेगुट्टालू की पहाड़ी क्षेत्र में पकड़ मजबूत हुई है।

    18 जवान भी घायल छत्तीसगढ़ में 21 दिन चले नक्सल विरोधी अभियान में 31 नक्सली मारे गए
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