राष्ट्र संवाद के 25 वर्ष: निष्पक्ष पत्रकारिता और राष्ट्रीय चेतना की मिसाल :प्रसेनजीत तिवारी
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर।तुलसी भवन के मानक सचिव सह भोजपुरी साहित्य परिषद के अध्यक्ष प्रसेनजीत तिवारी ने राष्ट्र संवाद के 25 वर्ष पूर्ण होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि “राष्ट्र संवाद राष्ट्रीय भाव और जन चेतना का सशक्त मंच बनकर उभरा है।”
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्र संवाद ने पत्रकारिता के 25 वर्षों की सतत, सफल और अनवरत यात्रा में राष्ट्रीय मूल्यों तथा सामाजिक उत्थान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को जिस मजबूती से स्थापित किया है, वह कार्य बड़े-बड़े समाचार पत्र भी शायद ही कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि यह सब राष्ट्र संवाद के संपादक देवानंद सिंह के भगीरथ प्रयासों का परिणाम है।
प्रसेनजीत तिवारी ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पत्रकारिता कई बार किसी न किसी विचारधारा या सत्ता को बढ़ावा देने का माध्यम बनती दिखाई देती रही है। ऐसे समय में निष्पक्ष पत्रकारिता और पाठकों को सच से रूबरू कराने की प्रतिबद्धता के साथ देवानंद सिंह ने संतुलन बनाए रखते हुए इस समाचार पत्र को 25 वर्षों तक निरंतर प्रकाशित किया है और आगे भी इसे जारी रखने के लिए संकल्पित हैं। यह उनके देशभक्ति, जीवटता और दूरदर्शिता का परिचायक है।
उन्होंने कहा कि यह समाचार पत्र केवल समाचारों के सकारात्मक, राष्ट्रीय और लोकपक्ष को ही अभिव्यक्ति नहीं देता, बल्कि पाठकों की रुचि को भी प्रक्षालित और परिष्कृत करता है। यही कारण है कि राष्ट्र संवाद पढ़ लेने के बाद भी सामान्य अखबारों की तरह बासी समझकर फेंक नहीं दिया जाता, बल्कि कई पाठकों के लिए यह संग्रहणीय बन जाता है।
प्रसेनजीत तिवारी ने बताया कि प्रारंभ में यह समाचार पत्र 32 पन्नों की ब्लैक एंड व्हाइट मासिक पत्रिका के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन आज यह एक संस्थान का रूप ले चुका है और पाठकों के जीवन का अहम हिस्सा बन गया है। उन्होंने कहा कि कई पाठकों को तो ऐसा लगता है कि बिना राष्ट्र संवाद पढ़े उनके दिन की शुरुआत ही नहीं होती।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भी राष्ट्र संवाद जन-जन की चेतना को राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति जागरूक करता रहेगा, कमजोर और पिछड़े वर्गों की सशक्त आवाज बनेगा तथा अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की भी याद दिलाते हुए समाज को दिशा देने का कार्य करता रहेगा।

