लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर सुंदरनगर थाना क्षेत्र के पंचायत इलाके में बिना स्वीकृत नक्शे के बनाए गए वेयरहाउस के खिलाफ जिला परिषद ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
बिना स्वीकृत नक्शे के बनाए गए वेयरहाउस
जिला परिषद की ओर से भीमसेन शर्मा, विमल शर्मा और अनिल गुप्ता को नोटिस जारी किया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने बिना नक्शा पास कराए वेयरहाउस का निर्माण कराया, जो नियमों का उल्लंघन है।
जिला परिषद अध्यक्ष बाड़ी मुर्मू ने बताया कि लंबे समय से अवैध निर्माण और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायतें मिल रही थीं। जांच में प्रथम दृष्टया नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना इस तरह का निर्माण संभव नहीं है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि नोटिसधारक सात दिनों के भीतर क्या जवाब देते हैं। जिला परिषद ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पृष्ठभूमि और कानूनी पहलू
झारखंड में पंचायती राज अधिनियम और नगरपालिका कानूनों के तहत किसी भी व्यावसायिक या औद्योगिक निर्माण के लिए स्वीकृत नक्शा अनिवार्य है। बिना नक्शा पास कराए निर्माण करना न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि पर्यावरण और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा करता है। सुंदरनगर क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में अवैध वेयरहाउस की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ा है।
जिला परिषद को झारखंड पंचायत राज अधिनियम, 2001 के तहत अवैध निर्माणों को रोकने, नोटिस जारी करने और आवश्यकता पड़ने पर ध्वस्तीकरण का आदेश देने का अधिकार प्राप्त है। इस मामले में जिला परिषद ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए तीन प्रमुख व्यवसायियों को नोटिस थमाया है।
जिला परिषद की शक्तियाँ और प्रक्रिया
नोटिस प्राप्त करने वाले पक्षकारों को 7 दिनों के भीतर अपने स्वामित्व दस्तावेज, भूमि उपयोग प्रमाणपत्र और यदि कोई नक्शा स्वीकृत है तो उसकी प्रति प्रस्तुत करनी होगी। यदि वे निर्धारित समय में संतोषजनक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं, तो जिला परिषद ध्वस्तीकरण आदेश पारित कर सकती है और संबंधित भूमि को अपने कब्जे में ले सकती है।
इसके अलावा, जिला परिषद ने यह भी संकेत दिया है कि इस मामले में सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच के लिए एक अलग समिति गठित की जा सकती है। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है।
प्रभाव और अगले कदम
इस कार्रवाई से क्षेत्र के अन्य अवैध निर्माणकर्ताओं में हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय निवासियों और व्यापार संगठनों ने जिला परिषद के इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही उन्होंने मांग की है कि कार्रवाई निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।
आने वाले दिनों में जिला परिषद द्वारा सभी पंचायतों में सर्वेक्षण कराकर अवैध निर्माणों की सूची तैयार करने की योजना है। इसके लिए ड्रोन तकनीक और जीआईएस मैपिंग का उपयोग किया जाएगा, ताकि कोई भी अवैध निर्माण छूट न जाए।
अधिक जानकारी के लिए जमशेदपुर देखें।
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