लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
लातेहार में जेएमएम का प्रदर्शन NEET पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज के विरोध में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में सामने आया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की लातेहार जिला कमेटी और छात्र मोर्चा ने संयुक्त रूप से समाहरणालय गेट के समक्ष जोरदार विरोध दर्ज कराया और केंद्र सरकार की छात्र विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की।
लातेहार में जेएमएम का प्रदर्शन: मुख्य बिंदु और घटनाक्रम
दिल्ली के जंतर-मंतर में NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में लातेहार झामुमो जिला कमेटी और छात्र मोर्चा ने समाहरणालय गेट के पास प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
जेएमएम नेता प्रभात कुमार ने कहा कि दिल्ली में छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन था, जिस पर पूर्व नियोजित तरीके से लाठीचार्ज किया गया। यह छात्र विरोधी सरकार है, इसकी हम निंदा करते हैं। हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्री जल्द इस्तीफा दें, नहीं तो सड़क से सदन तक उग्र आंदोलन होगा।
वहीं नेता सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन पर लाठी, डंडे और आंसू गैस चलाना और महिलाओं के साथ बर्बरता लोकतंत्र का प्रतीक नहीं है। इसके खिलाफ आज पूरे झारखंड में हर जिले में विरोध प्रदर्शन किया गया है।
NEET पेपर लीक मामले की पृष्ठभूमि और राष्ट्रीय प्रभाव
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) 2024 का पेपर लीक होना देश भर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इस घटना ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट तक ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को कड़ी फटकार लगाई है। छात्र समुदाय में व्याप्त आक्रोश स्वाभाविक है, क्योंकि वर्षों की मेहनत के बाद भी उन्हें अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। NEET परीक्षा भारत की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है और इसकी शुचिता बनाए रखना सरकार का संवैधानिक दायित्व है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा का राजनीतिक रुख और छात्र हित
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) झारखंड की सत्ताधारी पार्टी है और उसका छात्र मोर्चा लगातार युवाओं के मुद्दों को उठाता रहा है। लातेहार में जेएमएम का प्रदर्शन केवल स्थानीय घटना नहीं, बल्कि राज्यव्यापी विरोध की एक कड़ी था। पार्टी का मानना है कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर राज्यों के अधिकारों का हनन तो कर ही रही है, साथ ही युवाओं के भविष्य के साथ भी समझौता कर रही है। नेता प्रभात कुमार की चेतावनी “सड़क से सदन तक उग्र आंदोलन” इस बात का संकेत है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में विधानसभा और संसद दोनों में गूंजेगा। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले भी केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं।
लाठीचार्ज की घटना: लोकतंत्र पर प्रहार
दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों, जिनमें बड़ी संख्या में छात्राएं भी शामिल थीं, पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की चौतरफा निंदा हो रही है। विपक्षी दलों ने इसे “तानाशाही रवैया” करार दिया है। सौरभ श्रीवास्तव का बयान कि “महिलाओं के साथ बर्बरता लोकतंत्र का प्रतीक नहीं है”, बेहद गंभीर है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से भी इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने की मांग उठ रही है। लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है (अनुच्छेद 19), और उस पर बलप्रयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में ही न्यायसंगत माना जाता है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सवालिया निशान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग केवल JMM ही नहीं, बल्कि कांग्रेस, AAP, TMC समेत तमाम विपक्षी दल और छात्र संगठन कर रहे हैं। आरोप है कि NTA उनके मंत्रालय के अधीन काम करती है, इसलिए पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी उन्हीं की बनती है। हालांकि मंत्री जी ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का विश्वास जीतने में ये कदम नाकाफी साबित हो रहे हैं। पुतला दहन इस अविश्वास का प्रतीकात्मक इजहार है।
आगे की रणनीति और देशव्यापी असर
JMM ने स्पष्ट कर दिया है कि यह लड़ाई लंबी चलेगी। “पूरे झारखंड में हर जिले में विरोध प्रदर्शन” इस बात का प्रमाण है कि पार्टी ने इसे संगठनात्मक अभियान का रूप दे दिया है। आने वाले दिनों में झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठने की उम्मीद है। इसके अलावा, INDIA गठबंधन के घटक दल इस मुद्दे को संसद के आगामी सत्र में संयुक्त रूप से उठाने की रणनीति बना रहे हैं। छात्रों का एक बड़ा तबका पहले से ही सड़कों पर है, और राजनीतिक दलों का समर्थन मिलने से यह आंदोलन एक बड़े जनांदोलन में तब्दील हो सकता है। [INTERNAL_LINK_HOLDER]
अंत में, लातेहार में जेएमएम का प्रदर्शन यह स्पष्ट संदेश देता है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार को चाहिए कि वह तत्काल प्रभाव से NEET की निष्पक्ष जांच कराए, दोषियों को सजा दिलाए और परीक्षा प्रणाली को फुलप्रूफ बनाने के ठोस उपाय करे, ताकि देश के करोड़ों युवाओं का भरोसा व्यवस्था पर कायम रह सके।

