लेखक: राष्ट्र संवाद संवादाता
एल. ख्यांग्ते के घर पर CID की छापेमारी ने झारखंड की राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। यह कार्रवाई JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच हुई है, जिससे परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर उठे विवाद , परीक्षा में कथित अनियमितता की आरोपी के बीच, अब राज्य में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है।
आज CID की टीम ने JPSC के निवर्तमान अध्यक्ष , पूर्व मुख्य सचिव रहे एल. ख्यांग्ते के राँची के कांके रोड स्थित आवास पर छापेमारी कर रही है
CID और पुलिस की टीम JPSC के निवर्तमान अध्यक्ष , पूर्व मुख्य सचिव रहे एल. ख्यांग्ते के राँची के कांके रोड स्थित आवास पर छापेमारी कर रही है परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है।
हालांकि छापेमारी में क्या कुछ बरामद हुआ है इस पर सीआईडी या पुलिस के द्वारा कोई भी आधिकारिक रूप से जानकारी नही दी गई है।
बता दे कि इससे पहले 22 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के द्वारा. …’झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य (लिखित) प्रतियोगिता परीक्षा-2025’…. को स्थगित कर दिया गया था
साथ ही आयोग के वेबसाईट पर Examination Calendar-2026 के तहत प्रकाशित Proposed Exam Schedule Date: 09.07.2026 में अंकित शेष परीक्षाओं के लिए निर्धारित कार्यक्रम को भी अगले आदेश तक स्थगित किया है।
एल. ख्यांग्ते के घर पर CID की छापेमारी: घटनाक्रम का विवरण
झारखंड में JPSC की परीक्षाएं लंबे समय से विवादों में रही हैं। 14वीं सिविल सेवा परीक्षा के पेपर लीक और अनियमितता के आरोपों के बाद अभ्यर्थियों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद सरकार ने CID को जांच सौंपी। पूर्व मुख्य सचिव एल. ख्यांग्ते जो JPSC के निवर्तमान अध्यक्ष भी थे, उनके आवास पर छापेमारी इस जांच का एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि: JPSC विवादों का इतिहास
झारखंड लोक सेवा आयोग की स्थापना के बाद से कई परीक्षाएं विवादों में रही हैं। छठी JPSC परीक्षा में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई थीं, जिसके कारण परिणाम रद्द करना पड़ा था। सातवीं से दसवीं JPSC तक की परीक्षाओं में भी आरक्षण नियमों की अनदेखी और कट-ऑफ में गड़बड़ी के आरोप लगे। इन विवादों के कारण आयोग की साख पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
परीक्षा स्थगन का असर
22 जुलाई को आयोग द्वारा मुख्य लिखित परीक्षा और Examination Calendar-2026 के तहत प्रस्तावित परीक्षाओं को स्थगित करने का निर्णय लिया गया। इससे हजारों अभ्यर्थियों की तैयारी प्रभावित हुई है। आयोग ने अपनी वेबसाइट पर नोटिस जारी कर कहा कि अगले आदेश तक परीक्षाएं स्थगित रहेंगी। अभ्यर्थियों का कहना है कि बार-बार स्थगन से उनका समय और संसाधन बर्बाद हो रहा है।
छापेमारी की कानूनी प्रक्रिया
CID की टीम ने सर्च वारंट के आधार पर एल. ख्यांग्ते के आवास पर छापेमारी की। इस दौरान कंप्यूटर हार्ड ड्राइव, मोबाइल फोन, और परीक्षा से संबंधित गोपनीय दस्तावेज जब्त किए गए हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि जब्त सामग्री की फोरेंसिक जांच से अहम सुराग मिल सकते हैं। भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने की संभावना है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
विपक्षी दलों ने इस छापेमारी को सरकार की विफलता छिपाने का प्रयास बताया है। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। झारखंड हाई कोर्ट में भी इस मामले को लेकर याचिकाएं दायर की गई हैं। कोर्ट ने सरकार से जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी है।
अभ्यर्थियों की मांग
प्रतियोगी छात्र संगठनों ने मांग की है कि 14वीं JPSC परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए। उनका आरोप है कि प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में भी धांधली हुई थी। कई अभ्यर्थियों ने आमरण अनशन की चेतावनी दी है।
सरकार का पक्ष
मुख्यमंत्री कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। जांच एजेंसियों को खुली छूट दी गई है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी।
आगे क्या?
जांच एजेंसियां जब्त दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि परीक्षा रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए। Jharkhand Public Service Commission के इतिहास में यह सबसे बड़ा विवाद है।
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