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    Home » बंद पड़ी केबुल कंपनी के दुर्दशा के लिए स्थानीय प्रबंधक जिम्मेदार?
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    बंद पड़ी केबुल कंपनी के दुर्दशा के लिए स्थानीय प्रबंधक जिम्मेदार?

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 17, 2019No Comments4 Mins Read
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    बंद पड़ी केबुल कंपनी के दुर्दशा के लिए स्थानीय प्रबंधक जिम्मेदार?
    देवानंद सिंह

    कौन कर रहा है मुख्यमंत्री के छवि को खराब
    राजनीतिक और स्थिरता की अनिश्चितता को पीछे छोड़ कर झारखंड सधे कदमों से आर्थिक विकास के पथ पर तेज गति से आगे बढ़ रहा है ऐसे समय में इनकैब मामले में जब रिसीवर नियुक्त हुआ तो मुझे लगा की बंद पड़ी केबुल कंपनी पर लिखना चाहिए कंपनी की इस दुर्दशा के लिए कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं मजदूरों के पैसे को किन किन लोगों ने डुबोने का काम किया और बंद मृत सैया पर अंतिम सांसे गिन रही कंपनी के चहारदीवारी के भीतर किन लोगों के सह पर चोरों ने अपना साम्राज्य स्थापित कर पूरे माल को बेच डाला कई ऐसे सवाल हैं जिनका उत्तर ढूंढना लाजमी है
    पाठकों को राष्ट्र संवाद किश्तवार पढ़ाने का प्रयास करेगा
    प्रबंधन यूनियन और स्थानीय प्रबंधन के बीच मजदूरों की जो दुर्दशा हुई है उससे जमशेदपुर के जनप्रतिनिधि के साथ साथ प्रशासनिक अधिकारी भी वाकिफ हैं इन सबके बीच जिनका सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है मजदूर बेचारा आज भी आशा भरी निगाहों से न्यायालय की तरफ देख रहा है कि शायद कम से कम पीएफ का पैसा तो हमें मिले
    ज्ञात हो कि पिछले दिनों बंद परी केबुल कंपनी के लिए एनसीएलटी ने रिसीवर नियुक्त किया है वाईफाई के हटने के बाद मोदी सरकार ने सीक उद्योग के लिए एनसीएलटी नामक संस्था का गठन किया है
    नियुक्त हुए रिसीवर मुख्यालय कोलकाता कार्यालय और जमशेदपुर परिसर का भ्रमण कर पुणे रवाना हो चुका है रिसीवर यह पता लगाने की कोशिश में है कि कंपनी की देनदारी और बकाया का आकलन कैसे किया जाए क्योंकि रिपोर्ट 21 अगस्त को कोलकाता में जमा करना है
    सन2000 से अब तक पूर्व प्रबंधक या वर्तमान प्रबंधक ( आरबी सिंह और प्रेम सागर सिंह) दोनों आला अधिकारियों ने मजदूरों के बकाया का कोई आज तक आकलन ही नहीं किया जब रिसीवर नियुक्त हो चुका है तब मजदूरों का भविष्य अधर में दिख रहा है
    दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों स्थानीय प्रबंधक का प्रबंधन पर कोई भी बकाया नहीं है मजेदार बात यह है कि पहले नियुक्त किए गए प्रबंधक को कंपनी के द्वारा सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थी और दूसरे प्रबंधक काम संभालने के बाद मजदूरों के हितों की बात कम अपने हितों की रक्षा ज्यादा करने में लगे रहे? कंपनी के बंद होने के बाद दूसरे प्रबंधक ने तो बांग्ला को भी बंदरबांट करने में तेजी लगा रखी है मजदूरों की हित इनके संज्ञान में नहीं है सन 2012 के बाद जो भी मजदूर सेवानिवृत्त हुए हैं उनको पीएफ का पैसा आज तक नहीं मिला और मिलने की उम्मीद भी ना के बराबर है
    रिसीवर का जब जमशेदपुर परिसर का दौरा हुआ स्थानीय प्रबंधन ने प्रेस मीडिया से इन को
    कैसे दूर रखा जाए इसके सारे इंतजाम इनके द्वारा किया गया था? ऐसा स्थानीय मजदूरों का कहना है राष्ट्र संवाद की टीम ने जब मजदूरों से इस बाबत पूछताछ जानकारी चाहिए तो उन्होंने कहा कि कंपनी के अंदर सिर्फ ढांचा खड़ा है जो माल था वह तो चोरों ने बाजारों में बेच डाला जो रिसीवर नियुक्त हुए हैं उनको यह बताने में वर्तमान प्रबंधक और असमर्थ है कि कितने मजदूरों का कितना बकाया है
    स्थानीय लोगों ने बताया कि वर्तमान प्रबंधक माननीय मुख्यमंत्री का नाम लेकर धोश दिखाने का भी काम गाहे-बगाहे करते हैं इससे मुख्यमंत्री के छवि भी खराब हो रही है उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के शहर आगमन पर इस बार हम लोग मुख्यमंत्री से मिलकर इन बातों को भी रखने का काम करेंगे और उनसे आग्रह करेंगे की मजदूरों के हितों की रक्षा कैसे होगी इस पर वह विचार करें
    कुछ देर बाद एक पूर्व स्थानीय प्रबंधक के द्वारा 7:00 बजे आई वास के लिए बैठक बुलाई गई है उस बैठक के साथ हम अगली कड़ी में जिक्र करेंगे दोनों स्थानीय पूर्व प्रबंधक के कार्यों का भी
    क्रमश :

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