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    Home » इतिहास के आईने में पीओके क्षेत्र का सामाजिक एवं भौगोलिक परिस्थितियां
    Breaking News Headlines मेहमान का पन्ना संवाद विशेष

    इतिहास के आईने में पीओके क्षेत्र का सामाजिक एवं भौगोलिक परिस्थितियां

    Devanand SinghBy Devanand SinghMay 9, 2020No Comments5 Mins Read
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    इतिहास के आईने में पीओके क्षेत्र का सामाजिक एवं भौगोलिक परिस्थितियां-1971 के कांग्रेस के पाप को बनारस की धरती से धोना चाहते है, श्रधेय मोदी जी –#तीसरी आँखे पीओके पर#
    ——————-
    कालीचरण सिंह – पूर्व शिक्षक सह भाजपा कार्यकर्ता, की कलम से (आज का भारत)
    —————————————–
    पाक अधिकृत कश्मीर देश के आजादी के बाद से ही चर्चा का विषय रहा है ,आखिर क्या कारण है –? जिसका दंश भारत नित्य दिन झेल रहा है, इसका कुछ प्रसंग यादास्त के अनुसार अपनी कलम से अंकित कर रहा हूं।
    भारत के विभाजन और पाकिस्तान के अलग देश बनने के पहले जम्मू और कश्मीर डोगरा रियासत थी और इसके महाराजा हरिसिंह थे। अगस्त 1947 में पाकिस्तान बना और करीब 2 महीने बाद करीब 2.06 लाख वर्ग किलोमीटर में फैली जम्मू और कश्मीर की रियासत भी बंट गई। कहा यह जाता रहा है कि महाराजा हरिसिंह के देरी से लिए गए निर्णय और जवाहरलाल नेहरू के यूएन में जाने से जम्मू और कश्मीर बंट गया। हालांकि इसकी और भी वजहें हो सकती हैं।
    हम जिसे जम्मू और कश्मीर कहते हैं उसे हमें जम्मू, कश्मीर और लद्दाख कहना चाहिए था। यह संपूर्ण क्षेत्र महाराजा हरिसिंह की रियासत का हिस्सा था। इसी में गिलगित-बाल्टिस्तान का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। 1947 में विभाजन के समय यह क्षेत्र जम्मू एवं कश्मीर की तरह न तो भारत का हिस्सा था और न ही पाकिस्तान का। 1935 में ब्रिटेन ने इस हिस्से को गिलगित एजेंसी को 60 साल के लिए लीज पर दिया था, लेकिन इस लीज को 1 अगस्त 1947 को रद्द करके क्षेत्र को जम्मू एवं कश्मीर के महाराजा हरिसिंह को लौटा दिया गया।
    गिलगित-बाल्टिस्तान मिलने के बाद महाराजा हरिसिंह को स्थानीय कमांडर कर्नल मिर्जा हसन खान के विद्रोह का सामना करना पड़ा। खान ने 2 नवंबर 1947 को गिलगित-बाल्टिस्तान की आजादी का ऐलान कर दिया। हालांकि इससे 2 दिन पहले 31 अक्टूबर को हरिसिंह ने रियासत के भारत में विलय को मंजूरी दे दी थी। इसके साथ ही यह भारत का अभिन्न हिस्सा बन गया था।
    इसके 21 दिन बाद पाकिस्तान की सेना ने कबाइलियों के साथ मिलकर हमला किया और इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। कब्जे में गिलगित-बाल्टिस्तान के अलावा जम्मू का हिस्सा भी शामिल था। इस संपूर्ण भू-भाग को पाकिस्तान ‘आजाद कश्मीर’ कहने लगा जबकि भारत इसे ‘गुलाम कश्मीर’ मानता है। इसे सिर्फ ‘कश्मीर’ कहना ठीक नहीं है, क्योंकि इसमें जम्मू के भी हिस्से है
    फिर 1962 में भारत का जब चाइना से युद्ध हुआ तो चाइना ने लद्दाख के कुछ हिस्से पर अपना कब्जा कर लिया जिसे आज अक्साई चिन कहते हैं। हालांकि कुछ इसे गिलगित-बाल्टिस्तान का ही हिस्सा मानते हैं। फिर मार्च 1963 में पाकिस्तान ने पीओके के गिलगित-बाल्टिस्तान वाले हिस्से में से एक इलाका चाइना को गिफ्ट कर दिया। ये करीब 1,900 वर्ग मील से कुछ ज्यादा था।
    पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) को पाकिस्तान ने प्रशासनिक सुविधा के लिए दो हिस्सों में बांट रखा है, जिन्हें सरकारी भाषा में आज़ाद जम्मू-ओ-कश्मीर और गिलगित-बल्तिस्तान कहते हैं. पाकिस्तान में आज़ाद जम्मू और कश्मीर को केवल आज़ाद कश्मीर भी कहते हैं.
    1. पाक अधिकृत कश्मीर का प्रमुख यहीं का राष्ट्रपति होता है जबकि प्रधानमंत्री मुख्य कार्यकारी अधिकारी होता हैं जो कि मंत्रियों की एक परिषद द्वारा समर्थित होता हैं.
    भारत और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं की तुलना
    2. पाक अधिकृत कश्मीर (POK) अपने स्वशासन संबंधी विधानसभा का दावा करता है लेकिन यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि यह पाकिस्तान के नियंत्रण में काम करता है.
    3. पाक-अधिकृत कश्मीर, भारत के जम्मू व कश्मीर राज्य का वह हिस्सा है जिस पर पाकिस्तान ने 1947 में हमला कर अधिकार कर लिया था.
    4. पाक अधिकृत कश्मीर (POK); मूल कश्मीर का वह भाग है, जिसकी सीमाएं पाकिस्तानी पंजाब, उत्तर पश्चिम में अफ़गानिस्तान के वाखान गलियारे से, चीन के ज़िन्जियांग क्षेत्र से और भारतीय कश्मीर से पूर्व में लगती हैं.
    5. यदि गिलगित-बाल्टिस्तान को हटा दिया जाये तो आज़ाद कश्मीर का क्षेत्रफल 13,300 वर्ग किलोमीटर (भारतीय कश्मीर का लगभग 3 गुना) पर फैला है और इसकी आबादी लगभग 40 लाख है.
    6. आज़ाद कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद है और इसमें 8 ज़िले, 19 तहसीलीं और 182 संघीय काउन्सिलें हैं.
    7. पाक अधिकृत कश्मीर के दक्षिणी हिस्से में 8 जिले हैं: मीरपुर, भिम्बर, कोटली, मुज़फ़्फ़रआबाद, बाग़, नीलम, रावला कोट और सुधनती हैं.
    8. पाक अधिकृत कश्मीर के हुन्ज़ा-गिलगित के एक भाग, रक्सम एवं बाल्टिस्तान की शक्स्गम घाटी क्षेत्र को, पाकिस्तान द्वारा 1963 में चीन को सौंप दिया गया था. इस क्षेत्र को सीडेड एरिया या ट्रांस काराकोरम ट्रैक्ट कहते हैं.
    9. आजाद कश्मीर के लोग मुख्य रूप से खेती करते हैं तथा मक्का, गेहूं, वानिकी, और पशुधन आय का मुख्य स्रोत हैं.
    10. यहाँ पर निम्न श्रेणी के कोयला भंडार, चाक, बॉक्साइट के भंडार भी हैं, स्थानीय घरेलू उद्योगों में उत्कीर्ण लकड़ी की वस्तुओं को बनाना, वस्त्र और कालीन का उत्पादन किया जाता हैं.
    11. इस क्षेत्र में उत्पादित कृषि उत्पाद में मशरूम, शहद, अखरोट, सेब, चेरी, औषधीय जड़ी बूटियों और पौधों, राल, देवदार, कैल, चीर, प्राथमिकी, मेपल और जलाने वाली लकड़ी शामिल हैं.
    जिस व्यक्ति को राज्य की विधानसभा की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा जम्मू एवं कश्मीर के सदर ए रियासत, जो स्थानिक रूप से पदासीन राज्य की मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य कर रहे हैं, उसी रूप में स्थानिक रूप से मान्यता दी गई है, उनके लिये निर्देशों को जम्मू एवं कश्मीर के राज्यपाल के लिये निर्देश माना जायेगा।
    इसमें कहा गया है कि उक्त राज्य की सरकार के निर्देशों को, उनकी मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य कर रहे जम्मू कश्मीर के राज्यपाल के लिये निर्देशों को शामिल करता हुआ माना जायेगा।
    जब इंदिरा गांधी के पास आठ महीने का समय था तब वह किसी भी तरह से पाकिस्तान से कश्मीर मुद्दे को सुलझाने की दिशा में बातचीत कर सकती थीं। इससे पाकिस्तान से पीओके वापस लिया जा सकता था और पाकिस्तान तैयार भी हो जाता लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, और शिमला समझौते के तहत 17 दिसंबर 1971 कि यथा स्थिति बरकरार रखने पह सहमत हो गयीं। अगर तब इंदिरा गाँधी ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए थोडा भी प्रयास किया होता तो पीओके आज पाकिस्तान की कैद से आजाद होता।

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