लेखक: राष्ट्र संवाद संवादाता
नयी दिल्ली, 28 जुलाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार असम में बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।
केंद्र सरकार असम में बाढ़ प्रभावित
असम, जिसे पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता है, हर साल मानसून के मौसम में ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के उफान के कारण भीषण बाढ़ का सामना करता है। इस साल भी लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है, जिससे राज्य के 30 से अधिक जिले बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बाढ़ ने न केवल हजारों घरों को जलमग्न कर दिया है, बल्कि खड़ी फसलों, बुनियादी ढांचे और पशुधन को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। लाखों लोग विस्थापित होकर राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। इस विकट परिस्थिति में केंद्र और राज्य सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए असम के सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर राहत कार्यों की समीक्षा की और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
बैठक और प्रधानमंत्री का बयान
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद भवन परिसर में असम के केंद्रीय मंत्रियों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों से मुलाकात के बाद यह बात कही। इस साल अब तक, बाढ़ की वजह से राज्य में 68 लोगों की मौत हो चुकी है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘असम के सांसदों से मुलाकात की और राज्य के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की मदद के लिए असम सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। मैं सभी की सुरक्षा और कल्याण की कामना करता हूं।’’
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल तथा विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने भी इस बैठक में हिस्सा लिया।
बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र और आंकड़े
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के मुताबिक शिवसागर, गोलाघाट, चराइदेव, जोरहाट, नगांव और कामरूप (मेट्रोपॉलिटन) जिलों में कुल 4,45,495 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
एएसडीएमए के मुताबिक, बाढ़ पीड़ितों के लिए कुल 90 राहत शिविर संचालित किये जा रहे हैं और इनमें 28,695 लोगों ने आश्रय लिया है। इसके अलावा, 94 राहत वितरण केंद्र भी काम कर रहे हैं।
बुलेटिन के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और सिविल डिफेंस के जवानों समेत कई एजेंसियां बचाव और राहत कार्य में शामिल हैं तथा प्रभावित इलाकों में 67 नौकाएं तैनात की गई हैं।
एएसडीएमए के मुताबिक, बाढ़ की वजह से 37,139.52 हेक्टेयर में लगी फसल जलमग्न हो गई और 26,679 मवेशी बह गए।
राहत और बचाव कार्य
अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को बाढ़ की स्थिति में सुधार हुआ। उन्होंने बताया कि कई जिलों में जलस्तर घट रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि एक केंद्रीय टीम ने बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए सर्वाधिक प्रभावित जिलों में से एक, शिवसागर का दौरा किया।
बाढ़ राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमें दिन-रात बचाव अभियान चला रही हैं। प्रभावित गांवों तक नावों के जरिए राशन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा रही है। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग द्वारा बाढ़ जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं। पशुपालन विभाग भी मवेशियों के लिए चारे और चिकित्सा की व्यवस्था में जुटा है। केंद्र सरकार ने असम को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) से अतिरिक्त वित्तीय सहायता जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही, बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीमों का दौरा जारी है, ताकि प्रभावित किसानों और परिवारों को उचित मुआवजा दिया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण असम में बाढ़ की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है। ऐसे में केवल तात्कालिक राहत उपायों से काम नहीं चलेगा, बल्कि दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन रणनीति की आवश्यकता है। इसमें नदियों के तटबंधों का सुदृढ़ीकरण, बाढ़ मैदानों का पुनर्स्थापन, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना और समुदाय आधारित आपदा तैयारी शामिल हैं। असम सरकार ने केंद्र के सहयोग से ब्रह्मपुत्र नदी पर बांधों और जलाशयों के निर्माण की योजना भी प्रस्तावित की है, जिससे भविष्य में बाढ़ के प्रभाव को कम किया जा सके।
असम में बाढ़ की स्थिति के बारे में अधिक जानकारी के लिए 2024 असम बाढ़ देखें।
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