राष्ट्र संवाद संवाददाता
चांडिल वन क्षेत्र कार्यालय से महज चार किलोमीटर दूर रसुनिया जंगल में चल रहे कथित अवैध पत्थर खनन को लेकर दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के डीएफओ सवा आलम अंसारी ने कहा कि जिस स्थान पर खनन हो रहा है, वह वन भूमि नहीं है। ऐसे में यह मामला वन विभाग के बजाय जिला खनन विभाग का है
पत्रकारों से बातचीत में डीएफओ ने कहा कि विभाग की ओर से जांच कराई गई है। जांच में पाया गया कि संबंधित भूमि वन विभाग की नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि वन भूमि पर खनन होता तो विभाग तत्काल कार्रवाई करता।
इको सेंसिटिव जोन के करीब खनन होने के सवाल पर डीएफओ ने कहा कि यदि किसी के पास इस बात के प्रमाण हैं कि खनन वन भूमि पर हो रहा है, तो वे सबूत उपलब्ध कराएं। वन विभाग मामले की जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई करेगा।
रसुनिया जंगल में ट्रैक्टर, ड्रिल मशीन और डेटोनेटर के जरिए पत्थरों का खनन किए जाने का आरोप है। यह क्षेत्र दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के इको सेंसिटिव जोन से सटा हुआ बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खनन गतिविधियों से हाथियों के आवास और वन्यजीवों के प्राकृतिक मार्ग प्रभावित हो रहे हैं।
डीएफओ के बयान के बाद अब जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। वन विभाग जहां संबंधित भूमि को राजस्व भूमि बता रहा है,लेकिन अवैध खनन में लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है ,माफियों के हौसले बुलंद है ।

