कुछ ऐसा करना कि जब बाद तेरे
लिखी जाए कहानी तुम्हारी तो,
उसमें हौसले की बात हो
संघर्ष की जगती रात हो ।
गीत-छंद हों सफलता के भी,
कुछ संदेश विफलता के भी।
अंधकार से अधिक प्रकाश हो ,
थोड़ी प्रीत हो ,मधुमास भी हो।
लिखी जाए कहानी तुम्हारी तो,
तो ऐसी बातें हों कि पढ़ कर ,
मुरझाए पतझड़ को भी,
सावन बनना आ जाये।
जो राहों से रूठे बैठे हैं,
उनको भी चलना आ जाए।
:–डॉ कल्याणी कबीर

