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    Home » समय की रेत पर छाप छोड़ती युवा लेखिका प्रियंका सौरभ
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    समय की रेत पर छाप छोड़ती युवा लेखिका प्रियंका सौरभ

    Devanand SinghBy Devanand SinghMarch 7, 2024No Comments4 Mins Read
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    (महिला दिवस विशेष)

    समय की रेत पर छाप छोड़ती युवा लेखिका प्रियंका सौरभ

     

    युवा महिला लेखिका जो हिंदी और अंग्रेजी के 10,000 से अधिक समाचार पत्रों के लिए दैनिक संपादकीय लिख रही हैं जो विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित होते हैं। प्रमाणित सबूत गूगल के रूप में प्रियंका सौरभ और आपको सब कुछ मिल जायेगा। दुनिया के सबसे बड़े शिक्षा मंच unacademy और व्यक्तिगत यूट्यूब चैनल पर लड़कियों को मुफ्त कोचिंग प्रदान करना। विशेष रूप से निराश्रित महिलाओं और बच्चों, विधवाओं, विकलांग महिलाओं जैसी कठिन परिस्थितियों में महिलाओं और बच्चों के समर्थन और पुनर्वास के बारे में अपने लेखन और सेमिनार के माध्यम से लड़कियों और महिलाओं को शिक्षित करना। प्रियंका ने अभी तक पांच किताबें लिखी हैं, दो कविताएं ‘दीमक लगे गुलाब’ और ‘परियों से संवाद’, एक महिलाओं के मुद्दों और दर्द के बारे में है जिसका शीर्षक ‘निर्भयाएं’ है और एक अंग्रेजी में वर्तमान युग में महिलाओं की प्रगति के बारे में ‘फीयरलेस’ है। पांचवी पुस्तक समय की रेत पर समसामयिक निबंध है।

     

     

     

     

    *_रेनू शब्द मुखर*

    यह कहानी है हिसार के आर्यनगर गांव की बेटी 28 वर्षीय युवा लेखिका ‘प्रियंका सौरभ’ की, जो मौजूदा समय में महिला सशक्तिकरण की मिसाल हैं और अपनी कलम से नारी जगत के लिए आवाज उठा रही हैं। कविता के अलावा वे प्रतिदिन अपने संपादकीय लेखों से विभिन्न भाषाओं में लेखन कार्य कर रही हैं। उनकी कई पुस्तकें हाल ही में प्रकाशित हुई हैं। इनमें सामाजिक और राजनीतिक जीवन की कड़वी सच्चाई को व्यक्त करने वाले निबंध ‘दीमक लगे गुलाब’ और आधुनिक नारी की समस्याओं से रूबरू कराने वाली ‘निर्भयाएं’ शामिल हैं। इन दो किताबों के अलावा हर क्षेत्र में महिलाओं की प्रगति पर आधारित अंग्रेजी में ‘द फीयरलेस’ किताब शामिल है। समय की रेत पर इनका नया निबंध संग्रह है।

     

     

     

     

    युवा लेखिका प्रियंका सौरभ’ लगातार महिलाओं की समस्याओं पर लिखती रही हैं। प्रकाशित पुस्तकों में प्रियंका सौरभ ने आधुनिक नारी की वर्तमान समस्याओं को रखा है, जो वर्तमान में कहीं न कहीं उनके जीवन को प्रभावित कर रही हैं। प्रियंका सौरभ का जन्म आर्यनगर, हिसार, हरियाणा में हुआ। उनके पिता सुमेर सिंह उब्बा एक कानूनगो हैं और मां रोशनी देवी एक गृहिणी हैं। बचपन से ही उन्हें लिखने-पढ़ने का शौक रहा है। ये राजनीति विज्ञान में मास्टर और एमफिल हैं। वर्तमान में वे रिसर्च स्कॉलर हैं और हरियाणा सरकार में सीनियर असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं।

     

     

     

     

     

    उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा आर्यनगर गांव से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर और एमफिल की शिक्षा प्राप्त की। बचपन से ही उनकी साहित्य में रुचि रही है। शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने अपनी साहित्यिक रुचि नहीं छोड़ी। और अपना लेखन कार्य जारी रखा। कविता लेखन के साथ-साथ उन्हें संपादकीय लेखन का भी शौक है। प्रतिदिन उनके संपादकीय लेख देश भर के समाचार पत्रों में विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित होते हैं। प्रियंका ने अपनी पुस्तकों के प्रकाशन को समय का सदुपयोग बताया। इस दौरान उन्हें अपना क्रिएटिव लेवल बढ़ाने का मौका मिला है। फलस्वरूप इनकी कई पुस्तकें साहित्य जगत में आई हैं।

     

     

     

     

     

    प्रियंका सौरभ ने पिछले 10 वर्षों से सामाजिक कार्यों और जागरूकता से संबंधित कई संस्थानों और संगठनों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है और 2021 में उन्हें ‘आईपीएस मनुमुक्त’ मानव ‘राष्ट्रीय युवा पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। उनकी साहित्यिक और शैक्षणिक उपलब्धियों के परिणामस्वरूप, प्रियंका सौरभ को वर्ल्ड पीस फाउंडेशन द्वारा ‘मानद डॉक्टरेट’ से सम्मानित किया गया है।

     

     

     

     

    वर्ष 2022 में, उन्हें दिल्ली में ‘नारी रत्न पुरस्कार’ और रोहतक में ‘हरियाणा की शक्तिशाली महिला पुरस्कार’ से भूपेंद्र सिंह हुड्डा, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और गजेंद्र चौहान, भारतीय महाकाव्य महाभारत के युधिष्ठिर ने इनको सम्मानित किया।

    महिला दिवस विशेष) समय की रेत पर छाप छोड़ती युवा लेखिका प्रियंका सौरभ
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