मुंबई. मुंबई के शिवाजी पार्क में शुक्रवार को काकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. डिपके ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए और कहा कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को देश के दूसरे हिस्सों तक ले जाया जाएगा. उन्होंने आगे दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी.
शिवाजी पार्क से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन
डिपके ने इससे पहले घोषणा की थी कि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर मुंबई से आंदोलन शुरू किया जाएगा. प्रदर्शन के बाद इसे गोवा, कोलकाता समेत अन्य शहरों तक ले जाने और अंत में दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देने की योजना बताई गई थी. CJP की प्रमुख मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया को लेकर बदलाव और चुनाव आयोग में नियुक्तियों की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग शामिल है.
मुंबई पुलिस ने प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी थी. पुलिस की ओर से मैदान के इस्तेमाल, आवश्यक नागरिक अनुमति तथा यातायात और शोर से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया गया था. इसके बावजूद CJP ने प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की थी.
SIR प्रक्रिया को लेकर लगाए आरोप
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए डिपके ने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद शुरू हुई SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए. उन्होंने आरोप लगाया कि इन बदलावों का असर चुनावी प्रक्रिया पर पड़ सकता है.
हालांकि, इन दावों पर अलग-अलग पक्षों की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आई हैं. हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उसके विश्लेषण में SIR के तहत मतदाता नाम हटने और चुनाव परिणामों के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं मिला. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई नाम मृत्यु और स्थानांतरण जैसे कारणों से हटाए गए.
भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR-2026 से संबंधित मतदाता सूची और मतदाता सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराई गई है. मतदाता अपने नाम और चुनावी विवरण की जांच भी कर सकते हैं.
दिल्ली, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के आंकड़ों का जिक्र
डिपके ने अपने संबोधन में दिल्ली, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में हुए बदलावों के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए उन्हें चुनावी नतीजों से जोड़कर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में हटाए गए मतदाताओं की संख्या चुनावी जीत-हार के अंतर से काफी अधिक थी.
हालांकि, इन आंकड़ों और चुनाव परिणामों के बीच सीधा संबंध होने का दावा स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता. हिन्दुस्तान टाइम्स के विश्लेषण में भी मतदाता सूची से नाम हटने और चुनाव परिणामों के बीच स्पष्ट संबंध नहीं पाया गया.
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
डिपके ने चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई रिपोर्टों का हवाला देते हुए भी सवाल उठाए. इससे पहले एक रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों के बीच कुछ फैसलों को लेकर मतभेद होने की बात सामने आई थी. CJP ने इन्हीं घटनाक्रमों को अपनी मांगों के आधार के रूप में इस्तेमाल करते हुए चुनाव आयोग में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग की है.
हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि उसके निर्णय बहुमत के आधार पर लिए गए और निर्णय प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है. SIR प्रक्रिया में भी मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बदलाव किए जाने की जानकारी सामने आई है.
आंदोलन को देशभर में ले जाने की तैयारी
CJP ने कहा है कि मुंबई के बाद आंदोलन को दूसरे शहरों तक ले जाया जाएगा. इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देने की योजना है. डिपके ने इसे “जंतर-मंतर 2.0” नाम दिया है. इससे पहले CJP ने दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था और अब उसी तरह के आंदोलन को फिर से बड़े स्तर पर आयोजित करने की बात कही जा रही है.
डिपके ने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रखने की योजना है, जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं होती. CJP की ओर से पहले ही कहा गया था कि यदि CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा.
राजनीतिक दलों और सार्वजनिक हस्तियों की मौजूदगी
मुंबई के प्रदर्शन में कुछ सार्वजनिक हस्तियों और राजनीतिक समर्थकों की मौजूदगी भी देखी गई. हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार, अभिनेता शबाना आजमी, संगीतकार विशाल डडलानी और महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी प्रदर्शन में शामिल हुए. शिवसेना-यूबीटी के स्थानीय विधायक भी प्रदर्शन के मंच पर CJP के साथ दिखाई दिए.
प्रदर्शन के दौरान डिपके ने युवा और Gen-Z से धार्मिक आधार पर राजनीति से आगे सोचने की अपील भी की. उन्होंने भाजपा नीत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक नीतियों पर भी निशाना साधा.
महाराष्ट्र के चुनावी बदलाव का भी उठाया मुद्दा
डिपके ने महाराष्ट्र में 2024 के लोकसभा चुनाव और उसके कुछ महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों के बीच आए बड़े बदलाव को भी सवालों के केंद्र में रखा. उनके अनुसार, लोकसभा चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगियों के प्रदर्शन तथा विधानसभा चुनाव के परिणामों में काफी अंतर रहा, इसलिए चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है.
हालांकि, महाराष्ट्र के चुनाव परिणामों में बदलाव के कारणों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की अलग-अलग व्याख्याएं हैं. इसलिए डिपके के आरोपों को उनके राजनीतिक बयान और आंदोलन की मांगों के संदर्भ में देखा जा रहा है.
जंतर-मंतर तक पहुंचने की तैयारी
मुंबई में प्रदर्शन के बाद CJP का अगला बड़ा कदम दिल्ली का जंतर-मंतर बताया गया है. डिपके ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की बात कही है. इसी बीच दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्थाओं का मुद्दा भी सामने आया है. 2 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो के कई स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई.
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण, SIR प्रक्रिया, चुनाव आयोग की भूमिका और चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. CJP अपने आरोपों और मांगों के साथ आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि चुनाव आयोग की ओर से चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की गई है.ax

