वर्षों के संघर्ष को मिली ऐतिहासिक मंजिल, बेगूसराय में बनेगा दिनकर विश्वविद्यालय
राजेश कुमार,खोदावंदपुर/बेगूसराय। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती के अवसर पर 23 सितंबर को बेगूसराय के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई। बिहार सरकार की कैबिनेट ने बेगूसराय में रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दे दी।विश्वविद्यालय की स्थापना के क्रम में पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के वेतन आदि मद में 15 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति भी दी गई है। बेगूसराय में विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग लंबे समय से उठती रही है। इस मांग को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्र संगठनों और बेगूसराय प्रमंडल बनाओ अभियान समिति से जुड़े लोगों ने लगातार आवाज बुलंद की। धरना, प्रदर्शन, जनजागरण और विभिन्न स्तरों पर मांग उठाकर विश्वविद्यालय की आवश्यकता को सरकार और आम लोगों के बीच प्रमुखता से रखा जाता रहा। विश्वविद्यालय की स्थापना को मिली कैबिनेट की मंजूरी को इस लंबे संघर्ष का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि वर्षों तक लगातार उठाई गई आवाज अब सरकारी निर्णय के रूप में सामने आई है। इससे बेगूसराय में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में नई संभावनाएं खुलेंगी। राष्ट्रकवि दिनकर की जन्मभूमि और कर्मभूमि से गहरे जुड़ाव वाले बेगूसराय के लिए दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय विशेष महत्व रखता है। दिनकर की साहित्यिक एवं राष्ट्रीय चेतना की विरासत को उच्च शिक्षा के संस्थान के माध्यम से आगे बढ़ाने की दिशा में भी इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रमंडल की मांग को भी मिली नई मजबूती:-
विश्वविद्यालय की मांग के साथ बेगूसराय को प्रमंडल बनाने की मांग भी लंबे समय से उठती रही है। बेगूसराय प्रमंडल बनाओ अभियान समिति और विभिन्न छात्र संगठनों की ओर से दोनों मांगों को लेकर समय-समय पर आंदोलन और जनजागरण अभियान चलाए जाते रहे हैं।
विश्वविद्यालय की स्थापना को मिली स्वीकृति से आंदोलन से जुड़े लोगों में उत्साह है। अब उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की मांग पूरी होने के बाद बेगूसराय को प्रमंडल बनाने की वर्षों पुरानी मांग को भी आगे बढ़ाया जाएगा। आंदोलन से जुड़े लोगों ने इस उपलब्धि के लिए अभियान समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों, छात्र संगठनों तथा उन सभी लोगों के प्रति आभार जताया है, जिन्होंने इस मांग को लगातार जीवित रखा। उनका कहना है कि यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि लंबे समय से इस मांग को लेकर आवाज उठाने वाले सभी लोगों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
बहरहाल, 23 सितंबर 2026 का दिन बेगूसराय के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में दर्ज हो गया है। वर्षों से चली आ रही विश्वविद्यालय की मांग को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद अब लोगों की निगाहें विश्वविद्यालय की स्थापना की अगली प्रक्रिया पर टिकी हैं।
