बेंगलुरु. महज 15 साल की उम्र में भारतीय क्रिकेट के भविष्य के रूप में चर्चा में आए वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर बड़े मुकाबले में अपने बल्ले की चमक दिखाई. दलीप ट्रॉफी के पहले सेमीफाइनल में ईस्ट जोन ने सेंट्रल जोन को चार विकेट से हराकर फाइनल में जगह बना ली. 159 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए ईस्ट जोन ने 39.3 ओवर में छह विकेट खोकर 162 रन बनाए और मुकाबला अपने नाम कर लिया. कप्तान ईशान किशन 39 रन बनाकर नाबाद रहे, जबकि मोहम्मद शमी ने विजयी रन पूरा कर टीम को फाइनल का टिकट दिलाया.
इस जीत की सबसे बड़ी कहानी वैभव सूर्यवंशी की रही, जिन्होंने दोनों पारियों में आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 92 और 40 रन बनाए. पहली पारी में उन्होंने महज 81 गेंदों में 92 रन ठोक दिए. उनकी पारी में सात चौके और सात छक्के शामिल रहे. दूसरी पारी में भी उन्होंने 43 गेंदों पर 40 रन बनाए और ईस्ट जोन को लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हालांकि लक्ष्य के करीब पहुंचने से पहले उनकी पारी का अंत सेंट्रल जोन के कप्तान रजत पाटीदार के शानदार दौड़ते हुए कैच से हुआ.
सूर्यवंशी की पहली पारी इसलिए भी खास रही क्योंकि उन्होंने दलीप ट्रॉफी के इतिहास में अर्धशतक बनाने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. इतनी कम उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट के इस बड़े घरेलू टूर्नामेंट में जिस तरह उन्होंने आक्रामक बल्लेबाजी की, उसने एक बार फिर उनकी प्रतिभा और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता को सामने ला दिया.
ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच सेमीफाइनल मुकाबला शुरुआत से ही उतार-चढ़ाव भरा रहा. सेंट्रल जोन ने पहली पारी में 266 रन बनाए थे. रिंकू सिंह ने 60 रन की उपयोगी पारी खेलकर टीम के स्कोर को मजबूती दी. इसके जवाब में ईस्ट जोन भी 266 रन पर ही सिमट गया, लेकिन इस पारी का आकर्षण सूर्यवंशी की 92 रन की विस्फोटक पारी रही. युवा बल्लेबाज ने जिस अंदाज में गेंदबाजों पर दबाव बनाया, उससे मैच के समीकरण लगातार बदलते रहे.
इसके बाद दूसरी पारी में सेंट्रल जोन की बल्लेबाजी ईस्ट जोन के गेंदबाजों के सामने ज्यादा देर टिक नहीं सकी. पूरी टीम 158 रन पर आउट हो गई और ईस्ट जोन को जीत के लिए 159 रन का लक्ष्य मिला. ईस्ट जोन के लिए मुकेश कुमार सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने 44 रन देकर चार विकेट लिए. मोहम्मद शमी ने भी 56 रन देकर तीन विकेट हासिल किए. दोनों गेंदबाजों ने मिलकर सेंट्रल जोन के बल्लेबाजी क्रम को लगातार दबाव में रखा और ईस्ट जोन के सामने अपेक्षाकृत छोटा लक्ष्य रखा.
सेंट्रल जोन की दूसरी पारी में अमन मोखाड़े ने 41 रन बनाकर सबसे ज्यादा योगदान दिया. उनके अलावा अर्शद खान ने 25 और हर्ष दुबे ने 24 रन बनाए, लेकिन टीम बड़ा स्कोर खड़ा नहीं कर सकी. ईस्ट जोन के गेंदबाजों ने महत्वपूर्ण मौकों पर विकेट निकालते हुए विपक्षी टीम को 158 रन पर समेट दिया.
लक्ष्य का पीछा करने उतरे ईस्ट जोन को सूर्यवंशी ने दूसरी पारी में भी तेज शुरुआत दिलाई. उन्होंने 43 गेंदों पर 40 रन बनाकर टीम को जरूरी रन गति प्रदान की. हालांकि सेंट्रल जोन ने नियमित अंतराल पर विकेट निकालकर मुकाबले को फिर रोमांचक बना दिया. सूर्यवंशी के आउट होने के बाद भी कप्तान ईशान किशन ने संयम बनाए रखा और पारी को संभालते हुए टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाया. किशन 39 रन बनाकर नाबाद रहे. अंत में मोहम्मद शमी ने विजयी रन बनाकर ईस्ट जोन को चार विकेट से जीत दिला दी.
इस मुकाबले में मोहम्मद शमी का प्रदर्शन भी भारतीय क्रिकेट के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अनुभवी तेज गेंदबाज ने मैच में कुल पांच विकेट हासिल किए और घरेलू क्रिकेट में अपनी लय का मजबूत संकेत दिया. वह लंबे समय से भारतीय टीम में वापसी की कोशिश कर रहे हैं और इस तरह के प्रदर्शन के जरिए चयनकर्ताओं के सामने अपना दावा मजबूत कर रहे हैं. शमी ने भारत के लिए आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला पिछले वर्ष मार्च में दुबई में न्यूजीलैंड के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में खेला था.
दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में सूर्यवंशी का प्रदर्शन उनके बड़े मुकाबलों में लगातार प्रभाव छोड़ने की कहानी को आगे बढ़ाता है. विभिन्न आयु वर्ग और प्रारूपों में उन्होंने नॉकआउट मुकाबलों में महत्वपूर्ण पारियां खेली हैं. अंडर-19 स्तर पर एशिया कप से लेकर विश्व कप तक और आईपीएल के अहम मुकाबलों तक उनका रिकॉर्ड यह बताता है कि दबाव वाले मैचों में वह अपनी बल्लेबाजी शैली को लेकर पीछे नहीं हटते.
नॉकआउट मुकाबलों में सूर्यवंशी ने श्रीलंका के खिलाफ अंडर-19 एशिया कप 2024 के सेमीफाइनल में 67 रन बनाए थे. बांग्लादेश के खिलाफ 2024 एशिया कप फाइनल में उनके बल्ले से नौ रन आए. 2025 में बांग्लादेश के खिलाफ राइजिंग स्टार्स टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में उन्होंने 38 रन बनाए. उसी वर्ष अंडर-19 एशिया कप के सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने नौ रन और फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 26 रन बनाए.
2026 के अंडर-19 विश्व कप में भी सूर्यवंशी ने बड़े मुकाबलों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. अफगानिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने 68 रन बनाए, जबकि इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में उनका बल्ला जमकर चला और उन्होंने 175 रन की शानदार पारी खेली. आईपीएल 2026 में भी उन्होंने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ एलिमिनेटर में 97 और गुजरात टाइटंस के खिलाफ क्वालीफायर-2 में 96 रन बनाए. अब दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में 92 और 40 रन की पारियों ने उनकी इस सूची को और लंबा कर दिया है.
सभी प्रारूपों के 10 नॉकआउट मुकाबलों की बात करें तो सूर्यवंशी ने 11 पारियों में 717 रन बनाए हैं. उनका औसत 65.18 रहा है. इस दौरान उन्होंने एक शतक और पांच अर्धशतक लगाए हैं तथा उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 175 रन रहा है. आंकड़े यह संकेत देते हैं कि बड़े मंच और दबाव वाले मुकाबलों में सूर्यवंशी का प्रदर्शन लगातार प्रभावशाली रहा है.
ईस्ट जोन की इस जीत ने टीम को दलीप ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचा दिया है. हालांकि फाइनल की चुनौती से पहले टीम के लिए सबसे सकारात्मक संकेत सूर्यवंशी की बल्लेबाजी और शमी की गेंदबाजी रही. एक ओर युवा बल्लेबाज ने विपक्षी गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाया, तो दूसरी ओर अनुभवी शमी ने महत्वपूर्ण मौकों पर विकेट निकालकर अपनी उपयोगिता साबित की.
ईशान किशन की कप्तानी में ईस्ट जोन ने जिस तरह 159 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए दबाव झेला और अंततः मुकाबला अपने नाम किया, वह टीम के संयोजन और मानसिक मजबूती का भी संकेत है. नियमित अंतराल पर विकेट गिरने के बावजूद किशन ने पारी को संभाले रखा और नाबाद 39 रन बनाकर जीत की नींव मजबूत की.
सेंट्रल जोन ने मैच में वापसी के कई प्रयास किए. हर्ष दुबे ने दूसरी पारी में चार विकेट लेकर ईस्ट जोन की परेशानी बढ़ाई और रजत पाटीदार के शानदार कैच ने सूर्यवंशी की पारी का अंत भी किया, लेकिन लक्ष्य अपेक्षाकृत छोटा होने के कारण ईस्ट जोन अंततः मुकाबला अपने पक्ष में करने में सफल रहा.
अब ईस्ट जोन की निगाहें दलीप ट्रॉफी के फाइनल पर होंगी. टीम के लिए सबसे बड़ी उम्मीद यह होगी कि सूर्यवंशी बड़े मंच पर भी अपनी आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखें और शमी जैसे अनुभवी गेंदबाज अपनी लय बरकरार रखें. जिस तरह 15 साल के सूर्यवंशी ने एक बार फिर नॉकआउट मुकाबले में बड़ी पारी खेलकर टीम को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है, उसने भारतीय क्रिकेट में उनकी बढ़ती चर्चा को एक और मजबूत आधार दे दिया है. दलीप ट्रॉफी के इस मुकाबले में उनका 92 और 40 रन का योगदान केवल दो पारियां नहीं, बल्कि दबाव के मुकाबलों में लगातार प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता का एक और प्रमाण बनकर सामने आया है.

