लेखक: देवानंद सिंह
पाकिस्तान ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन की सामूहिक तस्वीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाया, जिससे उसकी असुरक्षा झलकती है। मोदी को हटाया जाना कूटनीतिक अपरिपक्वता दर्शाता है।
मोदी को हटाया: पाकिस्तान की कूटनीतिक चाल
किसी तस्वीर से किसी चेहरे को हटाना आसान है, लेकिन किसी देश के बढ़ते कद को तस्वीर से हटाना इतना आसान नहीं होता।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन से सामने आई तस्वीर को लेकर पाकिस्तान की कथित क्रॉपिंग ने यही सवाल खड़ा किया है कि आखिर पाकिस्तान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी से इतनी परेशानी क्यों है?
बिश्केक में आयोजित SCO सम्मेलन के दौरान राष्ट्राध्यक्षों की सामूहिक तस्वीर कूटनीतिक दस्तावेज की तरह होती है। उसमें हर देश की मौजूदगी अपने आप में एक संदेश होती है। लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय से साझा की गई तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हिस्सा नजर नहीं आया। तस्वीर को इस तरह क्रॉप किया गया कि भारत का प्रतिनिधित्व करने वाला चेहरा फ्रेम से बाहर हो गया।
यहां तक तो बात भारत विरोधी मानसिकता तक समझी जा सकती थी, लेकिन तस्वीर को काटते-काटते पाकिस्तान ने कथित तौर पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान को भी फ्रेम से बाहर कर दिया। यानी भारत को हटाने की जल्दबाजी में पाकिस्तान ने तस्वीर ही छोटी कर डाली। इसे कूटनीति कहें, प्रचार कहें या फिर असुरक्षा का डिजिटल प्रदर्शन फैसला दुनिया स्वयं कर सकती है।
विडंबना देखिए, पाकिस्तान भारत को तस्वीर से हटाना चाहता है, जबकि भारत दुनिया के बड़े बहुपक्षीय मंचों पर अपनी मौजूदगी लगातार मजबूत कर रहा है। किसी तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी दिखाई दें या न दें, इससे भारत की वैश्विक भूमिका पर कोई फर्क नहीं पड़ता। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में किसी देश का कद फोटोशॉप से नहीं, उसकी आर्थिक क्षमता, सामरिक शक्ति, कूटनीतिक पहुंच और वैश्विक स्वीकार्यता से तय होता है।
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम का जवाब किसी कटु बयान से नहीं, बल्कि पूरी तस्वीर साझा करके दिया। यही अंतर दो देशों की सोच को सामने रखता है। भारत ने संदेश दिया कि असहमति हो सकती है, प्रतिस्पर्धा हो सकती है, लेकिन बहुपक्षीय मंच की वास्तविकता को काटकर छोटा करने की जरूरत नहीं।
पाकिस्तान को शायद यह समझना होगा कि मोदी को तस्वीर से क्रॉप करने से भारत क्रॉप नहीं हो जाता। जिस भारत को वह फ्रेम से बाहर करना चाहता है, वही भारत आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होकर वैश्विक मंचों पर अपनी निर्णायक भूमिका तलाश रहा है।
कूटनीति में आत्मविश्वास का मतलब विरोधी की मौजूदगी मिटाना नहीं, बल्कि उसके सामने खड़े होकर अपनी बात मजबूती से रखना है। यदि किसी देश को किसी दूसरे राष्ट्राध्यक्ष की तस्वीर देखकर इतनी बेचैनी हो कि आधिकारिक तस्वीर तक को काटना पड़े, तो सवाल तस्वीर पर नहीं, उस बेचैनी पर उठता है।
पाकिस्तान चाहे तो तस्वीर के किनारे काट सकता है, चेहरों को फ्रेम से बाहर कर सकता है और सोशल मीडिया पर अपनी सुविधा के मुताबिक दृश्य प्रस्तुत कर सकता है। लेकिन दुनिया की सामूहिक स्मृति से भारत की मौजूदगी कैसे मिटाएगा?
फ्रेम आपका हो सकता है, लेकिन मंच सबका है। तस्वीर आप काट सकते हैं, भारत का कद नहीं।
यही इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा सबक है।
जिसे तस्वीर से हटाने की कोशिश की जा रही है, उसकी मौजूदगी ही शायद इतनी बड़ी है कि फ्रेम छोटा पड़ गया।
इस घटना से स्पष्ट है कि भारत की वैश्विक उपस्थिति को कोई तस्वीर काटकर कम नहीं कर सकता। विश्व मंच पर भारत की भूमिका दिनोंदिन मजबूत हो रही है। अधिक जानकारी के लिए SCO आधिकारिक वेबसाइट देखें।

