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    Home » यूसीआईएल वार्ता बेनतीजा: आश्रित महिलाओं का कंपनी परिसर में धरना, न्याय नहीं मिला तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
    झारखंड सरायकेला-खरसावां

    यूसीआईएल वार्ता बेनतीजा: आश्रित महिलाओं का कंपनी परिसर में धरना, न्याय नहीं मिला तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

    Aman OjhaBy Aman OjhaMarch 30, 2026No Comments3 Mins Read
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    राष्ट्र संवाद संवाददाता

     

    जादूगोड़ा क्षेत्र में ठेका मजदूरों के आश्रितों को न्याय दिलाने को लेकर सोमवार (30 मार्च 2026) को हुई त्रिपक्षीय वार्ता करीब तीन घंटे तक चली, लेकिन किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। बैठक में प्रबंधन की ओर से डीजीएम राकेश कुमार, एम.के. साहू, गिरीश गुप्ता और आर.के. मिश्रा उपस्थित रहे, जबकि जनप्रतिनिधियों की ओर से पूर्व जिला परिषद सदस्य व मजदूर नेता बाघराय मार्डी, मंगल सोरेन, सोभेन्दू मार्डी, रीना टुडू, धर्मू टुडू, सुनील हासदा समेत कई लोग शामिल हुए। गौरतलब है कि 13 से 15 जनवरी तक बाघराय मार्डी के नेतृत्व में हड़ताल और आंदोलन किया गया था, जिसके बाद 16 फरवरी तक मृतक आश्रितों को स्थायी नौकरी देने का लिखित आश्वासन यूसीआईएल प्रबंधन द्वारा दिया गया था। वार्ता विफल होने के बाद मृतक आश्रित महिलाएं रावंदे सोरेन और सोम्बारी हांसदा कंपनी परिसर के अंदर ही धरने पर बैठ गई हैं। उनका कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, वे परिसर से बाहर नहीं जाएंगी। महिलाओं ने प्रबंधन पर डेढ़ साल से वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि अब या तो उन्हें न्याय मिले या फिर वे जान देने को मजबूर होंगी। इस स्थिति से प्रबंधन में हड़कंप मच गया है और अधिकारी लगातार उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन महिलाएं अडिग हैं। मामला 2024-25 में कार्य के दौरान हुई लापरवाही से श्याम सोरेन और जयराम हासदा की मौत से जुड़ा है। पूर्व में ऐसे मामलों में आश्रितों को नौकरी देने की परंपरा रही है और इसी आधार पर यहां भी सहमति बनी थी। सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद अब तक नियोजन नहीं दिया गया है। पूर्व में यूसीआईएल के सीएमडी ने भी बोर्ड अनुमोदन के बाद एक महीने के भीतर नियुक्ति का आश्वासन दिया था, लेकिन वर्तमान बैठक में प्रबंधन की चुप्पी ने नाराजगी और बढ़ा दी है। बाघराय मार्डी ने आरोप लगाया कि प्रबंधन बोर्ड अनुमोदन दिखाने से बच रहा है और अन्य क्षेत्रों—नरवा, तुरामडीह व बागजाता—में आश्रितों को नौकरी देने के बावजूद यहां भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो फिर से जोरदार आंदोलन किया जाएगा। ठेका मजदूरों ने भी प्रबंधन पर क्षेत्र को अंधेरे में रखने और आउटसोर्सिंग के जरिए रोजगार खत्म करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि भाटीन, महुलडीह समेत कई यूनिटों में आउटसोर्सिंग से स्थानीय लोगों का भविष्य संकट में है और यदि यही स्थिति रही तो क्षेत्र में बेरोजगारी और आर्थिक संकट गहराएगा।

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