यूसीआईएल अस्पताल अब “रेफरल हॉस्पिटल” बनकर रह गया, बदहाल व्यवस्था पर फूटा लोगों का गुस्सा
डॉक्टरों की भारी कमी, जर्जर बेड, खराब उपकरण और गंदगी से जूझ रहा अस्पताल, मरीज बोले—अब यह अस्पताल वेंटिलेटर पर है
राष्ट्र संवाद मुख्य संवाददाता
जादूगोड़ा:यूसीआईएल अस्पताल, जादूगोड़ा की स्थिति लगातार बदहाल होती जा रही है। स्थानीय निवासी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह अस्पताल अब सिर्फ “टाटा रेफर हॉस्पिटल” बनकर रह गया है। इलाज के नाम पर मरीजों को सुविधा नहीं बल्कि सीधा टाटानगर भेजा जा रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी है—जहां 15 डॉक्टरों की आवश्यकता है, वहां केवल 8 डॉक्टर ही कार्यरत हैं, और उनमें भी स्पेशलिस्ट डॉक्टर पूरी तरह से अनुपस्थित हैं। महिलाओं के लिए गायनोकॉलॉजिस्ट भी नहीं हैं, जिससे गर्भवती महिलाओं को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

नर्सों की संख्या में भी भारी गिरावट है। कई नर्सों के सेवानिवृत्त होने के बाद नई नियुक्ति नहीं हुई, जिससे सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। अस्पताल में हाइड्रोलिक बेड अब तक नहीं लगे हैं और 50 साल पुराने जर्जर बेडों से ही काम चलाया जा रहा है। पंखे धीमे चलते हैं, टेबल गंदे हैं और पूरे अस्पताल परिसर में गंदगी फैली हुई है। 16 करोड़ की दवाओं की खरीद के बावजूद मरीजों को पूरी दवाएं नहीं मिल रही हैं। पहले यहां ऑपरेशन की सुविधा थी, अब वह भी बंद हो चुकी है। चाइल्ड वार्ड पर ताले लगे हैं, जिससे मरीजों की संख्या लगातार घट रही है।

एक गंभीर मामला यूसीआईएल के पूर्वकर्मी गुरबा मांझी का सामने आया, जिनकी मौत टाटानगर रेफर के दौरान हुई, क्योंकि उन्हें स्थानीय स्तर पर पर्याप्त इलाज नहीं मिल सका। अस्पताल परिसर के बाहर की सड़कें भी जर्जर हालत में हैं और कई बार मरीज गिरकर घायल हो चुके हैं। वाटर कूलर अधिकतर खराब हैं, और मुर्दाघर के बगल में ही कैंटीन बना दी गई है, जिससे मरीज असहज महसूस करते हैं।

सीएमडी डॉ. संतोष कुमार सतपथी से लोगों को उम्मीद थी, लेकिन वे भी सुधार लाने में विफल रहे। ब्रांडेड दवाएं शुरू तो हुईं, परंतु मिलना नियमित नहीं हो पा रहा है। डिजिटल एक्स-रे मशीन की घोषणा कई बार हो चुकी, लेकिन आज तक नहीं लग पाई है। सीएमओ डॉ. मानस कुमार रजक अगले 4 महीनों में और डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य 2026 में रिटायर हो जाएंगे, लेकिन नए डॉक्टरों की बहाली नहीं हो रही है।

सीएमओ डॉ. भट्टाचार्य ने बताया कि 2 वर्षों से हाइड्रोलिक बेड की खरीद के लिए जेम पोर्टल पर प्रयास जारी है, लेकिन आईडी की समस्या आ रही है। डिजिटल एक्स-रे जल्द शुरू करने की योजना है। एक डॉक्टर की बहाली भी संभावित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यूसीआईएल अस्पताल अब खुद वेंटिलेटर पर है, और यह चिंता का गंभीर विषय है। अगर समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो यह अस्पताल नाममात्र का रह जाएगा।


