ऊँचा पद नहीं, लोगों की ज़िंदगी में बदलाव ही असली सफलता : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
एनआईटी जमशेदपुर के 15वें दीक्षांत समारोह में छात्रों को दिया प्रेरक संदेश
सरायकेला।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर के 15वें दीक्षांत समारोह में सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छात्रों को सफलता और सामाजिक दायित्व का गहरा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि केवल ऊँचे पद तक पहुँचना ही सफलता नहीं है, बल्कि जब ज्ञान और कार्य से आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए, वही सच्ची सफलता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि एनआईटी जमशेदपुर पिछले 65 वर्षों से विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रहा है। इस दीक्षांत समारोह में कुल 1,114 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें से 612 छात्र व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने इसे परिश्रम का फल बताते हुए कहा कि यह समय नए संकल्प लेने का भी है।
छात्रों को राष्ट्र निर्माता बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षण संस्थान केवल डिग्री देने की जगह नहीं, बल्कि भविष्य की सोच गढ़ने वाली प्रयोगशालाएं हैं। उन्होंने तकनीक को मानव कल्याण से जोड़ने और साइबर ठगी जैसी चुनौतियों का समाधान निकालने की अपील की।
समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने हल्के-फुल्के अंदाज में छात्रों से उत्साहपूर्वक तालियां बजाने की बात कही, जिससे पूरा माहौल जीवंत हो गया। उन्होंने विद्यार्थियों को माता-पिता और शिक्षकों के प्रति कृतज्ञ रहने की सीख भी दी।
कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि डिग्री प्राप्त करना नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है। उन्होंने जमशेदजी टाटा और रतन टाटा का उदाहरण देते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय गरिमा के महत्व पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर एमएससी (भौतिकी) के कृष्णाशिष मंडल और बीटेक (इलेक्ट्रिकल) के प्रियांशु राज को राष्ट्रपति के हाथों गोल्ड मेडल प्रदान किया गया।

कार्यक्रम स्थल की ओर जाते समय राष्ट्रपति ने सादगी दिखाते हुए सड़क पर काफिला रुकवाया और लोगों से उतरकर अभिवादन किया, जिससे उपस्थित जनसमूह में उत्साह का माहौल बन गया।

