झारखंड आंदोलन के दो महानायक को श्रद्धांजलि निर्मल महतो की 38वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब, दिशोम गुरु की याद में भी आंखें नम
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर।झारखंड के अमर शहीद और झारखंड आंदोलन के अग्रणी नायक निर्मल महतो की 38वीं शहादत दिवस पर शुक्रवार को पूरा जमशेदपुर उन्हें नमन करता नजर आया। बिष्टुपुर स्थित चमरिया गेस्ट हाउस और कदमा के उलियान स्थित निर्मल महतो के समाधि स्थल पर दिनभर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा।

इस बार का शहादत दिवस खास रूप से भावुक रहा, क्योंकि हाल ही में झारखंड आंदोलन के प्रणेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन ने झारखंड की आत्मा को झकझोर कर रख दिया है। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित हर व्यक्ति की आंखें नम थीं, क्योंकि झारखंड ने अपने दो ऐसे सपूतों को खोया है जिनकी बदौलत यह राज्य आज अस्तित्व में है।

ज्ञात हो कि 28 अगस्त 1987 को चमरिया गेस्ट हाउस के मुख्य द्वार पर निर्मल महतो की निर्ममता से हत्या कर दी गई थी। उसी बलिदान के बाद झारखंड अलग राज्य की मांग ने नई गति पकड़ी और अंततः वर्ष 2000 में झारखंड को राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे प्रमुख लोग: ईचागढ़ विधायक सविता महतो (निर्मल महतो की परिजन) झामुमो के प्रदेश प्रवक्ता मोहन कर्मकार पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो आंदोलनकारी नेता सूर्य सिंह बेसरा झामुमो, आजसू, वाम दलों समेत कई सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता और आम नागरिक सभी ने एक स्वर में कहा कि निर्मल महतो और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के सपनों का झारखंड अभी अधूरा है, और उसे पूरा करने के लिए संघर्ष की आवश्यकता है। श्रद्धांजलि सभा सादगी और संकल्प के भाव से भरी रही।

आज झारखंड जिन कंधों पर खड़ा है, वे कंधे अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका सपना, उनकी लड़ाई और उनके आदर्श हर झारखंडी के दिल में जीवित हैं।


