कुर्मी/कुड़मी महतो को ST सूची में शामिल करने का विरोध, आदिवासी संगठनों ने राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन
राष्ट्र संवाद संवाददाता
चांडिल: कुर्मी/कुड़मी महतो समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में शामिल करने के प्रस्ताव के खिलाफ शनिवार को आदिवासी समाज ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन के बैनर तले ईचागढ़, चांडिल, नीमडीह और कुकड़ु प्रखंड के विभिन्न आदिवासी समुदायों के लोगों ने एकजुट होकर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को संबोधित ज्ञापन ईचागढ़ प्रखंड विकास अधिकारी के माध्यम से सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया है कि कुर्मी/कुड़मी महतो को ST सूची में शामिल करना वास्तविक आदिवासी समुदायों के अधिकारों पर सीधा हमला होगा। संगठन ने अपने ज्ञापन में पांच प्रमुख तर्क प्रस्तुत किए—
आदिवासी अधिकारों पर खतरा: इस निर्णय से असली आदिवासी समुदायों के आरक्षण और संवैधानिक अधिकार प्रभावित होंगे।
लोकुर समिति मानदंड का उल्लंघन: ST दर्जा के लिए आवश्यक मानदंड जैसे सांस्कृतिक विशिष्टता, भौगोलिक अलगाव और सामाजिक पिछड़ापन—यह समुदाय पूरा नहीं करता।
ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक अंतर: कुर्मी/कुड़मी महतो की भाषा, परंपरा और संस्कृति आदिवासी समाज से अलग है।
पहले से OBC दर्जा: यह समुदाय पहले से अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल है, ऐसे में ST दर्जा की मांग अनुचित है।
आदिवासी नेताओं ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि कुर्मी/कुड़मी महतो को ST सूची में शामिल करने की मांग तुरंत निरस्त की जाए, ताकि संविधान की भावना और आदिवासी समुदायों के अधिकार सुरक्षित रहें।
इस अवसर पर शिलु सारना टुडू, मानिक सिंह सरदार, श्यामल मार्डी, महाबीर हांसदा, डोमन बास्के, श्यामचंद किस्कू, सूचंद उरांव सहित कई लोग उपस्थित थे।

