एसटी दर्जे की मांग पर आमने-सामने आदिवासी और कुड़मी समाज, दोनों ने दिखाई ताकत
राष्ट्र संवाद मुख्य संवाददाता
जमशेदपुर:अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग को लेकर कुड़मी समाज और इसके विरोध में आदिवासी समाज के बीच तनावपूर्ण माहौल बनता जा रहा है। एक ओर कुड़मी समाज ने “कुड़मी अधिकार रैली” के माध्यम से आंदोलन तेज करने की घोषणा की है, तो दूसरी ओर आदिवासी समाज ने इसे अपनी संस्कृति और अस्तित्व पर हमला बताते हुए आक्रोश रैली निकाली।
निर्मल गेस्ट हाउस में हुई बैठक में ‘वृहद झारखंड कुड़मी समन्वय समिति’ का गठन किया गया। संयोजक हरमोहन महतो, शीतल ओहदार और कुड़मी सेना के अध्यक्ष शैलेंद्र महतो ने 2 नवंबर से 11 जनवरी तक राज्यव्यापी रैलियों का कार्यक्रम घोषित किया। 23 नवंबर को जमशेदपुर में बड़ी रैली होगी, जिसमें तीन राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। कुड़मी नेताओं ने कहा कि उनकी मांगें—एसटी सूची में शामिल होना और कुड़माली भाषा को 8वीं अनुसूची में दर्ज करना—उनके अधिकार और अस्मिता की लड़ाई है।
वहीं, आदिवासी समाज ने जमशेदपुर में विशाल आक्रोश रैली निकालकर कुड़मी समाज को एसटी में शामिल करने का विरोध किया। उन्होंने उपायुक्त को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि आदिवासी संस्कृति और पहचान से कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा।
दोनों समाजों के आमने-सामने आने से क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। अब नजर सरकार की अगली रणनीति पर टिकी है, जो इस विवाद को संतुलित समाधान की दिशा दे सके।

